




रतलाम 13 अगस्त। हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर गढ़ कैलाश स्थित अमृत सागर तालाब की पाल पर प्राचीन समय से चली आ रही पारंपरिक मेले की परंपरा को पुन: प्रारंभ किया गया। मेले का शुभारंभ आचार्य महामंडलेश्वर 1008 स्वामी श्री विश्वोकानंद भारती जी द्वारा विधिवत मंत्रोच्चार एवं ऋचाओं के पाठ के साथ किया गया। उन्होंने मेले के शुभारंभ की घोषणा करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद प्रदान किया।
आचार्य महामंडलेश्वर जी ने कहा कि मेले हमारी धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हैं। ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता के साथ-साथ मनोरंजन, लोक परंपराओं तथा विभिन्न कला-कौशल के संगम का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। उन्होंने इस पारंपरिक मेले को पुन: प्रारंभ करने की पहल के लिए सनातन धर्म सभा को धन्यवाद देते हुए इसे हमारी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
मेले के अवसर पर श्रीमती तारा बहन सोनी एवं उनकी मंडली तथा महिलाओं द्वारा भजन-कीर्तन एवं सत्संग का आयोजन किया गया, जिसका श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। वहीं मेले में लगाए गए झूले एवं अन्य मनोरंजन के साधनों का बच्चों एवं आमजन ने उत्साहपूर्वक लुत्फ उठाया। देर शाम तक महिलाओं, बच्चों एवं अन्य आगंतुकों का मेले में आना-जाना जारी रहा। पूरे परिसर में धार्मिक आस्था के साथ उत्सव एवं उल्लास का वातावरण बना रहा।
मेले के शुभारंभ अवसर पर अखंड आश्रम के स्वामी श्री देवस्वरूपानंद जी, सनातन धर्म सभा अध्यक्ष अनिल झालानी, गढ़ कैलाश अध्यक्ष सतीश राठौर, संरक्षक बलबीर सिंह राठौर, दिनेश वाघेला, सुरेश दवे, दिनेश राठौर, सतीश भारती, सनातन धर्म महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती रजनी व्यास, श्रीमती तारा बहन सोनी, श्रीमती आशा शर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सनातन धर्म सभा द्वारा आयोजित इस पारंपरिक मेले के पुन: प्रारंभ होने से शहर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा मिली तथा नागरिकों में विशेष उत्साह एवं प्रसन्नता का वातावरण देखने को मिला। जिसे आगामी वर्ष में और अधिक व्यवस्थित, सुविधायुक्त और बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया जाएगा ।