पर्वाधिराज पर्यूषण के आठ दिन आत्मा के साथ जियो – श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा

रतलाम, 08 सितंबर। पर्वाधिराज पर्यूषण आत्मा को निर्मल बनाने आए है। पर्यूषण के आठांे दिन आत्मा के साथ जियो। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मान और माया सभी कषायों से दूर रहकर आत्म साधना करो। आठ दिन अपने मन को मोडना है। यदि इन दिनों में आत्मा की शुद्धि के लिए साधना कर लीे, तो सुखी हो जाओगे।
ये उदगार मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने व्यक्त किए। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में पर्वाधिराज पर्यूषण के पहले दिन विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मा का साध्य आध्यात्मिक और शरीर का साध्य भौतिक सुख की प्राप्ति है। आत्मा से जुडे साधन सुख के कारण और शरीर से जुडे साधन दुख के कारण होते है। आध्यात्मिक सुख जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। पर्यूषण के आठ दिनों में साधना करके ऐसा लक्ष्य पा लिया, तो जीवन सफल हो जाएगा।
प्रवर्तक श्री ने कहा कि पर्यूषण के दिनों में शास्त्र का श्रवण करना चाहिए। शास्त्र अनुसार जो भी नियम बताए गए है, उनका पालन करना चाहिए। शास्त्रों में श्रावकों के लिए चार और साधुओं के लिए पांच कर्तव्य निहित है, जिनका पालन करते हुए साधना करना चाहिए। पर्यूषण का अंतिम दिन क्षमा का है। यदि किसी से कोई भूल हो जाए अथवा वर्ष भर में किसी का दिल दुखाया हो, तो इस दिन क्षमा याचना कर लेना चाहिए। इससे मन हल्का हो जाता है और मन हल्का रखने वाला सदैव सुखी रहता है।
धर्मसभा को उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा एवं महासती श्री चंदनबालाजी मसा ने भी संबोधित किया। उन्होंने पर्वाधिराज पर्यूषण को आत्म विवेचन का पर्व बताते हुए पर्व के दौरान प्रतिदिन आत्म शुद्धि के लिए जीने का आव्हान किया। इस दौरान प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8 सहित सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, महासती श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे।
धर्मसभा में श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। पर्यूषण के पहले दिन प्रदेश एवं देश विभिन्न स्थानों से गुरूभक्तों ने रतलाम पहुंचकर धर्मलाभ लिया। धर्मसभा का संचालन प्रकाश मूणत द्वारा किया गया।

तपस्याएं जारी, 41 सूत्रीय संकल्प पत्र
पर्वाधिराज पर्यूषण के दौरान प्रवर्तकश्री की निश्रा में लगातार तपस्याएं चल रही है। मंगलवार को महासती चंद्रयशाजी मसा ने 35 उपवास के प्रत्याख्यान में 34 उपवास की तपस्या पूर्ण की। प्रखर गंग ने 24 उपवास और क्रिजंल मेहता के 23 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। अन्य तपस्वियों ने अलग-अलग तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। धर्मसभा में 41 सूत्रीय संकल्प पत्र का वितरण किया गया। इसमें श्रावक-श्राविकाआंे से रात्रि भोजन त्याग सहित विभिन्न प्रकार के त्याग का संकल्प का आव्हान किया गया है।

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