


मैसूरु । स्थानकवासी जैन संघ हल्लदकेरी के तत्वावधान में जैन स्थानक भवन में राष्ट्रसंत डॉ कमल मुनि कमलेश ने संवत्सरी क्षमा पर्व पर विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आग से कभी आग को बुझाया नहीं जा सकता, वैसे ही क्रोध को कभी क्रोध से समाप्त नहीं किया जा सकता है । प्रयास करना भी आग घी डालने के समान है । उन्होंने कहा क्रोध के वश में धार्मिक व्यक्ति भी अंधा बना हुआ चांडाल और राक्षस बन जाता है । खून के रिश्ते का भी प्यासा बन जाता है । विवेक का दीपक बुझ जाता है । क्रोध की ज्वाला में त्याग तपस्या साधना जलकर खाक हो जाती है, मुनि कमलेश ने बताया क्रोध के कारण आत्मा दुर्गति की मेहमान बनती है । विचारों में क्रूरता आ जाती है । हिंसा और अनर्थ की जननी है, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज जैसे असाध्य रोगों का शिकार शरीर बनता है । अमृत के समान किया हुआ भोजन भी जहर के रूप में बदल जाता है ।
राष्ट्रसंत ने कहा विश्व के सभी धर्म और महापुरुषों ने साधना का मुख्य लक्ष्य क्रोध पर विजेता बताया है, क्रोध विजेता विश्व विजेता से बढ़कर है । सांप के मुंह में ही जहर होता है, परंतु व्यक्ति के रोम रोम में क्रोध का जहर व्याप्त हो जाता है, वह परमाणु बम से खतरनाक है । वह तो बाहर का नुकसान करता है, परंतु क्रोध सर्वनाश करता है, वर्षों के प्रेम के रिश्ते एक पल के क्रोध में नष्ट हो जाते हैं द्य बड़े से बड़ा अनर्थ कर देता है, मात्र पश्चाताप शेष रहता है ।
जैन संत ने कहा क्षमा के माध्यम से ही क्रोध पर विजय पाई जा सकती है, कायर आदमी क्षमा नहीं कर सकता, क्षमा वीरों का आभूषण है । यह अपने आप में सब से महान तपस्या है, क्षमा मांगने से आत्मा निर्मल और पवित्र बन जाती है । क्षमा का दान सबसे महान दान है, क्षमा अपनाने वाला ही सच्चा पंडित विद्वान त्यागी और तपस्वी है, यह साधना का सच्चा आभूषण है, धर्म और मोक्ष का सच्चा अधिकारी है । कौशल मुनि ने अंत गढ़ सूत्र का वाचन किया ।
अक्षत मुनि, घनश्याम मुनि ने विचार व्यक्त किया। सक्षम मुनि ने मंगलाचरण किया । बाल वृद्ध युवा मातृशक्ति भारी संख्या में आत्म शुद्धि के लिए उपवास से लेकर 8 और 10 उपवास तपस्या की उनका संघ की ओर से अभिनंदन किया गया । प्रतिक्रमण करके विश्व के सभी जीवों से क्षमा याचना की अंतर्राष्ट्रीय जैन दिवाकर विचार मंच के मंत्री विशाल मेहता जोधपुर, जगदीश जैन छोटी सादड़ी राजस्थान का स्वागत किया गया द्य संचालन मंत्री बुधमल बाघमार ने किया ।