

रतलाम। सरस्वती संगीत महाविद्यालय, काटजू नगर, रतलाम में आयोजित तीन दिवसीय शास्त्रीय भरतनाट्यम नृत्य कार्यशाला का समापन हुआ। समापन अवसर पर सरस्वती शिशु शिक्षा समिति के सचिव श्री शैलेंद्र सुरेका ने कहा कि भरतनाट्यम भारत के प्राचीन एवं प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति तमिलनाडु के मंदिरों से हुई है। यह नृत्य हमें सिखाता है कि हमारा शरीर एक मंदिर है और नृत्य उस मंदिर में की जाने वाली पूजा के समान है। हमें अपनी इस गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व करना चाहिए तथा इसे संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहिए।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा से परिचित कराना तथा इस कला के प्रति रुचि एवं अभिरुचि विकसित करना था। तीन दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को भरतनाट्यम की बारीकियों को समझने और अपनी कला को निखारने का अवसर प्राप्त हुआ।
सरस्वती शिशु शिक्षा समिति द्वारा वर्ष 2010 से संचालित सरस्वती संगीत महाविद्यालय में विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महाविद्यालय में शास्त्रीय गायन, तबला, कथक, हारमोनियम एवं सितार सहित विभिन्न विधाओं की शिक्षा प्रदान की जाती है।
इस अवसर पर सरस्वती शिशु शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र सखलेचा, उपाध्यक्ष श्री सुनील लाठी, श्री जवाहर चौधरी, प्राचार्य श्रीमती तोषी शर्मा तथा संगीत महाविद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे।