‘शतायु’ गच्छाधिपति जन्म शताब्दी दिवस पर कल 100 आराधक करेंगे आयम्बिल

शहर के सभी प्रमुख जिनालयों में होगी भव्य अंगरचना

रतलाम। सुविशाल सागर समुदाय के प.पू.आचार्य देव शतायु गच्छाधिपति श्री दोलतसागरसूरीश्वर जी म.सा. का जन्म शताब्दी दिवस आज आस्था और आराधना के साथ मनाया जायेगा। आराधक शतायु गच्छाधिपति के उत्तम स्वास्थ्य के साथ चिरंजीवी होने की मंगल कामनाएं करते हुए तप-आराधना करेंगे। वे गुजरात के सुरत में विराजित है। पूज्य आचार्य देव श्री बंधुबेलड़ी की प्रेरणा से शतायु गणनायक के शताब्दी जन्म महोत्सव प्रसंग पर कल बुधवार को देश दुनिया में पौषध, उपवास, आयम्बिल, नवकार भाष्य जाप, सामायिक की आराधना सहित अन्य तपस्याएँ भक्तजन करेंगे।
रतलाम के सभी प्रमुख जिन मन्दिर पर भव्य अंगरचना की जाएगी। इनमें श्री मोती पूज्यजी मन्दिर चौमुखीपुल, श्री शांतिनाथजी जैन मन्दिर व कबीर सा. मन्दिर थावरिया बाजार, श्री अजितनाथ जी मन्दिर सेठजी का बाजार, श्री शामला पार्श्वनाथ जी मन्दिर,श्री महावीरधाम तेजा नगर, करमचंद जी जैन मन्दिर हनुमान रूंडी, श्री लालचंद मन्दिर आदि शामील है।
श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय श्री ऋषभदेव केशरीमल जैन श्वे.पेडी ने बताया प.पू.साध्वी श्री पूर्णयशाश्रीजी म.सा., प.पू.साध्वी श्री कल्पयशाश्रीजी म.सा., प.पू.साध्वी श्री सूचि प्रज्ञाश्रीजी म.सा., प.पू.साध्वी श्री जिग्नेशरत्नाश्रीजी म.सा. व प.पू.साध्वी श्री राजगुणाश्रीजी म.सा. की निश्रा में स्नात्र महोत्सव व जन्म शताब्दी महोत्सव पर 100 आराधक आयम्बिल तथा सामूहिक सामायिक गुजराती उपाश्रय सायर चबूतरा पर करेंगे।
इसी क्रम में बन्धु बेलड़ी के चातुर्मास हेतु जिले के सैलाना में विराजित शिष्य रत्न पन्यास प्रवर श्री प्रसन्नचन्द्रसागर जी एवं बडनगर में विराजित गणिवर्य श्री आनंदचन्द्रसागर जी म.सा की प्रेरणा से तप-आराधना एवं सामायिक की आराधना की जाएगी। सभी जगह सोशल डिस्टेंस नियमों का पालन किया जायेगा।
वही सुरत के 230 जिनालय और 170 घर देरासर में भव्य अंगरचना होगी। जबकि जैन तीर्थ अयोध्यापुरम में परमात्मा के पवित्र स्त्रोत द्वारा अखंड अभिषेक, देरासर जी में 100 दीपक के साथ भव्य आरती, अखंड जाप 100 स्वस्तिक – 100 दीपक – 100 नैवैध- 100 फल से सजावट, तीर्थ में विराजित साधु साध्वीजी भगवंत द्वारा अखंड जाप सहित अन्य आयोजन सेवा परिवार द्वारा किये जायेंगे।
81 वर्ष का सुदीर्ध संयम पर्याय के शतायु स्वामी-
अपने संदेश में आचार्य बन्धु बेलड़ी ने कहा कि दुनिया में 7 अरब से अधिक लोग है। जिनमे में 3.2 लाख शतायु बुजुर्ग है, वही भारत में शतायु बुजुर्गों की संख्या करीब 30 हजार है। इनमे से भी शतायु साधु संत बमुश्किल 20 से 25 होंगे। यह सागर समुदाय के लिए गौरव का क्षण है कि इनमे से एकमात्र मुनि, आचार्य श्री दोलतसागरसूरीश्वर जी म.सा हमारे समुदाय के शतायु गच्छाधिपति है। आपने कहा कि 100 वर्ष की आयु में से 81 वर्ष का सुदीर्ध संयम पर्याय के स्वामी का आज हम जन्म शताब्दी महोत्सव मनाने जा रहे है। पूज्य श्री जिनशासन की सच्ची ‘दौलत’ होकर वे निश्चल, निश्छल, निर्मल हमारे समुदाय के नायक है। आपका होना ईश्वर की दौलत है, आपका आशीर्वाद ही हमारी दौलत है। हम उनके चिरंजीवी होने की परमात्मा से प्रार्थना करते है।