- दीक्षा अंगीकार करने के बाद दोनों नवदीक्षितो के चेहरे खिल उठे
- प्रवर्तक श्री के मुखारविंद से धर्मदास गण में 37 वीं दीक्षा हुई


रतलाम। श्रमण भगवान महावीर स्वामी के 2623 वें जन्मकल्याणक व आचार्य श्री उमेशमुनिजी की 70वीं दीक्षा जयंती दिवस पर धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी ने अपार जनसमुदाय की उपस्थिति में नेहरू स्टेडियम पर रतलाम के युवा व्यापारी मनीष नलवाया के पिता 68 वर्षीय मुमुक्षु “राजमल नलवाया” व सराफा व्यापारी सुभाष मुणत की बेटी “श्रुति मुणत” को जैन भगवती दीक्षा का पाठ पढाया।
दीक्षा अंगीकार करने के बाद दोनों नवदीक्षितो के चेहरे खिल उठे। इनके चेहरे की रौनक देखते ही बनती थी। इस तरह धर्मदास गण में प्रवर्तक श्री के मुखारविंद से 37 वीं दीक्षा हुई। दीक्षा ग्रहण करवाने के बाद नवदीक्षित राजमल नलवाया का श्री रत्नेशमुनिजी व नवदीक्षिता श्रुति मुणत का साध्वी संयतीजी नामकरण की घोषणा की गई। रत्नेशमुनिजी प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी के शिष्य बने। वहीं साध्वी संयतीजी साध्वी मधुबालाजी की शिष्या बनी। इस तरह पांच दिवसीय दीक्षा महोत्सव का सभी ने पूरा पूरा लाभ लिया।
मुमुक्षुओं के जयकारों से पांडाल गुंजायमान हो गया
आयोजित दीक्षा महोत्सव का प्रारंभ प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी ने मंगलाचरण से किया। इसके पश्चात् प्रवर्तक श्री ने दीक्षा विधि प्रारंभ करने के पूर्व अखिल भारतीय श्री धर्मदासगण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनीत वागरेचा, श्री धर्मदास जैन श्री संघ के अध्यक्ष अशोक चतुर व दोनों दीक्षार्थियों के स्वजनों से औपचारिक आज्ञा लेकर दीक्षा विधि प्रारंभ की। इसके पूर्व दोनों मुमुक्षु महाभिनिष्क्रमण यात्रा के साथ परिवारजन एवं जनसमुदाय के साथ दीक्षा महोत्सव स्थल पहुंचे। इस समय समूचा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। यहां अणुवत्सश्री संयतमुनिजी, तत्वज्ञ धर्मेन्द्रमुनिजी, रोचक वक्ता संदीपमुनिजी व साध्वी मधुबालाजी ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। साध्वी चतुर्गुणाजी, प्रणिधीजी, प्रेक्षाजी व भव्यताजी ने स्तवन प्रस्तुत किया। उपस्थित श्रावक श्राविकाओं ने मुक्त कंठ से दोनों नवदीक्षितों की अनुमोदना कर दोनों के परिवारजन को धन्यवाद एवं साधुवाद दिया।
63 संयमी आत्माओं का मिला पावन सानिध्य
श्रीसंघ सचिव सोहनलाल रूनवाल एवं अशोक भरगट ने बताया कि इस दीक्षा प्रसंग पर धर्मदास गणनायक प्रवर्तक जिनेन्द्रमुनिजी, अणुवत्स संयतमुनिजी , संघहित चिंतक धर्मेन्द्रमुनिजी, रोचकवक्ता संदीपमुनिजी आदि ठाणा 20 एवं साध्वी मधुबालाजी, मुक्तिप्रभाजी, प्रेमलताजी, संयमप्रभाजी, पुण्यशीलाजी आदि ठाणा 43 सहित कुल 63 चारित्र आत्माओं का पावन सानिध्य मिला।
सांसारिक जीवन का अंतिम उद्बोधन देकर सामूहिक क्षमायाचना की
दीक्षा के पूर्व दोनों मुमुक्षु राजमल नलवाया व श्रुति मुणत ने अपने सांसारिक जीवन का अंतिम उद्बोधन दिया व हाथ जोड़कर सभी से सामूहिक क्षमायाचना की। दीक्षा महोत्सव के संपूर्ण लाभार्थी श्रीमती कंचनबाई इंदरमल मूणत एवं समस्त मूणत परिवार रहा। समारोह में श्री संघ व अणु मित्र मण्डल द्वारा दीक्षार्थियों का अभिनंदन पत्र भेंट कर बहुमान किया गया। वहीं श्री संघ द्वारा मुमुक्षु राजमल के वीर पुत्र- मनीष नलवाया व पुत्रवधु संगीता नलवाया एवं मुमुक्षु श्रुति के वीर माता-पिता किरण सुभाष मुणत आदि का भी बहुमान किया गया। समारोह में धर्मदास गण परिषद् के अध्यक्ष विनीत वागरेचा, श्री धर्मदास जैन श्री संघ के अध्यक्ष अशोक चतुर, संतोष मुणत, मनीष नलवाया, स्वीटी कांकरिया आदि ने अपने विचार रखे। समारोह में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उघम मंत्री चैतन्य काश्यप व पूर्व सांसद कांतिलाल भुरिया आदि भी उपस्थित थे। संचालन राजेश कोठारी ने किया।
बड़ी दीक्षा 27 अप्रैल को रतलाम में होगी
गौरतलब है कि रतलाम नगरी बहुत ही पुण्यशाली है कि एक के बाद एक धार्मिक आयोजन का लाभ शहरवासियों को मिल रहा है। इसी के अंतर्गत श्री संघ के महामंत्री अजीत मेहता व अणु मित्र मण्डल के अध्यक्ष नवदीप मुणत ने बताया कि दोनों नवदीक्षितों की बड़ी दीक्षा 27 अप्रैल को रतलाम में होगी। जिसकी अनुमोदना का लाभ यहां सभी को मिलेगा।
मुमुक्षु कृति पटवा की दीक्षा 3 मई को रतलाम में होगी
श्री संघ के प्रचार सचिव ललित कोठारी ने बताया कि यहां दीक्षाओं का ठाठ लगा हुआ है। प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी के मुखारविन्द से 21 अप्रैल को दो दीक्षा संपन्न हुई। 28 अप्रैल को युवा मुमुक्षु श्रैयांश चौरड़िया की दीक्षा होना है। वहीं रतलाम के दिनेश पटवा की सुपुत्री मुमुक्षु कृति पटवा की जैन भगवती दीक्षा 3 मई को रतलाम में ही होगी। कृति पटवा की दीक्षा की घोषणा प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी ने 21 अप्रैल को दीक्षा महोत्सव में की।
भीषण गर्मी में भी कठोर तपस्या
इस समय भीषण गर्मी के चलते कोई भी तपस्या करना सामान्य बात नहीं है। उसके बावजूद भी यहां तपस्याओं का दौर चल रहा है। युवा तपस्वी धर्मेन्द्र मेहता ने रविवार को 16 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। इनको रविवार को 15 उपवास की तपस्या थी।