प्रभु भक्ति संदेश- “विश्वास, भक्ति और गुरु सेवा से जीवन बने स्वर्ग से भी श्रेष्ठ” : श्री श्री 108 मुनि श्री सद्भाव सागर जी मसा.

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रतलाम 28 सितंबर । आज रविवार को श्रुति संवर्धन वर्षा योग 2025 आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी मसा. के शिष्य मुनि श्री 108 सद्भाव सागर जी मसा. एवं छुल्लक 105 श्री परम योग सागर की मसा. द्वारा कस्तूरबा नगर स्थित भगवान आदिनाथ मंदिर में मुनि श्री सद्भाव सागर जी ने कहा भक्ति पूर्वक विश्वास किया जाता है वह जीवन स्वर्ग से भी श्रेष्ठ है जहां पर चित्त प्रभु भक्ति में मग्न हो, अंतरंग में गुरु सेवा का,गुरु दर्शन का आगमन हो, धर्म के प्रति भाव हो,अपने चित्त को धन्यवाद दें कि हम आज प्रभु भक्ति में लगा हुआ है वह आंखें ही आंखें हैं जो भगवान के मुनियों के दर्शन के लिए लालायित है बाकी सब कांच के टुकड़े हैं वह हाथ ही हाथ है जिन्होंने इन हाथों से जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया है वह हाथ नहीं वह साक्षात समुद्र पार करने के पतवार के समान है पथवारी तो इस जीवन समुद्र को पार करती है आपका यह हाथ रूपी पथवार आपको यह संसार रूपी समुद्र से पार कराएगे। यह हाथ एक हाथ वह है जो कभी किसी जीव पर उठ जाता है एक हाथ वह है जो जुड़ जाते हैं उठने वाले हाथ कषाय उत्पन्न करते हैं और जुड़ने वाले हाथ जुड़ते हैं उठने वाले हाथ से रिश्ते टूटते हैं और जो जुड़ते हुए हाथ है उससे रिश्ता जोड़ते हैं, वह हाथ जुड़ा था जब मंडप में तो संसार में कन्या मिली थी। यहां परमात्मा के चरणों में हाथ जोड़कर खड़े हो जाओगे निश्चित से मुक्ति कन्या मिलने वाली है, मोक्ष लक्ष्मी मिलेगी। वह जिव्हा धन्य है जो परमात्मा के गुणो में अपना प्रयोग कर रही है जिसके मुख से वितरागिता जिन जिसके मुख से आहो भाव प्रभु भक्ति के स्वर गुंजायमान हो रहे हैं। वह जिव्हा भी धन्य है। वह अन्य जिव्हा है तो तलवार के समान है। वह वाणी ही वीणा है जो प्रभु भक्ति में जिन देवों के गुणो की आराधना कर रही है। वह वाणी ही वीणा बन जाती है जो निरग्रंथा की भक्ति से सरों बार है इसलिए जीवन में सब कुछ चला जाए चले जाने देना लेकिन विश्वास मत जाने देना विश्वास बना रहेगा तो आप प्रतिदिन नई-नई उमंग नए-नए उत्साह नए-नए प्रीति से भर जागे जब जब सुबह तुम आंख खोलते हो तो तुम्हें विश्वास होता हो जाता है कि हम जिंदा है और दिन की शुरुआत हो चुकी है अब हम इस उत्साह से जिएंगे। परमात्मा पर विश्वास करो उतना देव शास्त्र और गुरु पर विश्वास करो। परमात्मा की भक्ति करने से संसार मिटता है यह विश्वास होना चाहिए। देव, शास्त्र,गुरु की पूजा करने से दर्शन करने से हमारी कषाय मिटती है पुण्य बढ़ता है यह विश्वास होना चाहिए।

आज एक नियम
सांसों को साध लो, 1 मिनट प्राणायाम करना है उसमें 12 बार पहले तीर्थंकर मैं सांस लेना है दूसरे तीर्थंकर मैं सांस छोड़ना है इस तरह 12 बार करो 1 मिनट में 24 तीर्थकरो को श्वसोच्श्वास से याद करना है। 1 मिनट में जब भी हो जाएगी और श्वासोश्वास से जीवन में खुशियों से भर देगी पुण्य से भर देगा क्योंकि मन से किया हुआ जो जाप है कई गुना लाभ देगा। अपने-अपने पुण्य को अपने-अपने तरीके से बढ़ाएं। आप सबका जीवन सफल हो। भगवान महावीर स्वामी की जय। उक्त आशीर्वचन म प्रवचन में दिए।
मुनि श्री सद्भाव सागर जी एवं छुल्लक श्री श्री 105 श्री परम योग सागर जी मसा. 30 सितंबर तक कस्तूरबा नगर स्थित भगवान आदिनाथ मंदिर पर ही विराजित रहेंगे।

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