राजेश मेहता के नेत्रदान से दो जीवनों में जगमगाई नई रोशनी

रतलाम 24 अक्टूबर। कभी-कभी किसी का जाना भी किसी और के जीवन में उजाला छोड़ जाता है। ऐसा ही प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है श्रीमालीवास निवासी, सुश्रावक स्व. सुरेशचंद्र मेहता के सुपुत्र राजेश मेहता (आलीशान) ने। उनके निधन उपरांत परिजनों ने उनका नेत्रदान (कॉर्निया डोनेशन) कर दो जरूरतमंद व्यक्तियों को नई दृष्टि और नई उम्मीद दी है।
नेत्रम संस्था के संयोजक हेमन्त मूणत ने बताया कि रवि पिरोदिया एवं संजय नेनानी ने दिवंगत के भाई संदीप, शैलेश, नीलेश, पंकज, सौरभ और पीयूष मेहता (पुत्र कोशिल मेहता) सहित परिजनों को नेत्रदान हेतु प्रेरित किया। परिवार ने सहर्ष सहमति देते हुए इस मानवता भरे कार्य को स्वीकृति दी।
नेत्रम संस्था ने तुरंत ही बड़नगर स्थित गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी. एल. ददरवाल को सूचना दी। सूचना प्राप्त होते ही डॉ. ददरवाल, मनीष तलाच और परमानंद राठौड़ ने तत्परता से रतलाम पहुँचकर नेत्रदान की प्रक्रिया को पूर्ण किया।
इस दौरान अशोक दख, अनिल दख, अंतिम दख, आनंदीलाल दख, नीरज बरमेचा, विजय मेहता, सौरभ कटारिया, विजय मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, भगवान ढलवानी, सुशील मीनू माथुर,प्रशान्त व्यास, सुयश माथुर सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
नेत्रम संस्था ने मेहता परिवार का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि –

“नेत्रदान जीवनदान है — जो व्यक्ति स्वयं नहीं देख सकता, उसे दुनिया दिखाने का यह सबसे सुंदर माध्यम है।”
संस्था ने नागरिकों से अपील की है कि वे भी आगे आकर नेत्रदान का संकल्प लें और किसी अंधेरे जीवन में रोशनी बनें।

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