
रतलाम । ग्राम रसूलपुर मुंडली के प्रगतिशील किसान श्री दशरथ पाटीदार जो की कोरोना काल के पश्चात अपने परिवार के स्वास्थ्य के बारे में काफी परेशान थे। परिवार से विचार विमर्श कर जैविक खेती की ओर अग्रसर हुए और आज एक नए आयाम पर हैं। स्वयं केंचुआ खाद बना कर अपने खेत मे उपयोग कर जैविक खेती कर रहे हैं और आसपास के किसानों को केंचुआ खाद का विक्रय कर प्रतिवर्ष दो लाख रुपये केंचुआ खाद से ही आय अर्जित कर रहे हैं ।
किसान श्री दशरथ पाटीदार ने बताया कि सोयाबीन, लहसुन व अन्य फसलों का उत्पादन लगातार कम हुआ तो हमने 2021 में कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा में मिट्टी की जांच करवाई जिसमें सामने आया कि हमारे खेत की उपजाऊ क्षमता कमजोर हो गई, जिसमें मुख्य तौर पर जीवांश कार्बनिक पदार्थ की मात्रा एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है। तब हमने कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, कालूखेड़ा एवं उद्यानिकी विभाग की अनेक योजनाओं का लाभ लेकर केचुआ खाद बनाना शुरू किया ।इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र से जैविक खेती का 25 दिवस का प्रशिक्षण प्राप्त किया और अधिकारियों के मार्गदर्शन में जैविक खेती की अवधारणा की ओर अग्रसर हुए। सबसे पहले केंचुए खाद का उत्पादन केवल एक बेड से शुरू किया, उसका मैंने खेतों में प्रयोग किया । उसके परिणाम मिले और आज देखते ही देखते केंचुआ खाद की डिमांड हमारे क्षेत्र के आसपास के किसानों ने भी की और आज खेत की जरूरत के बाद लगभग दो लाख रुपए का केंचुआ खाद सालाना बेच देते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग एवं उद्यान की विभाग के अधिकारियों द्वारा सीजन शुरू होने से पूर्व खेती से संबंधित समस्याओं से अवगत होकर उनका निदान संबंधित उपाय बताते हैं और उन्हीं के अनुरूप हम खेती करते हैं। नई-नई फसलों की उन्नतशील प्रजातियों का ही चयन कर फसल उत्पादन लिया जाता है। अधिकारियों के मार्गदर्शन में खरीफ़ में सोयाबीन की फसल का रकबा कम कर मूंगफली और मक्का लिया। जिससे मुझे सोयाबीन की अपेक्षाकृत ज्यादा लाभ मिला। वर्तमान में मेरे खेत में गेहूं, जौ एवं बेड पर हल्दी चना टमाटर मिर्च अदरक धनिया लहसुन आदि लगा रखा है।
यह खेती हमने पहली बार कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों के मार्गदर्शन में कर रहे हैं। अनुमान है कि गेहूं से अच्छा लाभ रहेगा। मैंने हल्दी को घर पर ही पाउडर तैयार कर लगभग 200 रुपए प्रति किलो पाउडर बेचा, जिससे अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हुई।
मैं जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु केंचुआ खाद उत्पादन को और अधिक बढ़ाऊंगा और आसपास के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करूगा।