
मैसूरु। स्थानकवासी जैन संघ हल्लदकेरी के तत्वावधान में विराजित राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने स्थानक भवन में धर्मसभा में कहा कि मानवीय मूल्यों का मापदंड धन वैभव सत्ता न होकर सद्गुणों के आधार पर सभी धर्म के महापुरुषों ने बताया है, उसी के आधार पर मानवता का विकास होगा ।
जैन संत ने कहा जिसके पास जितना ज्यादा बड़ा पद विलासिता से परिपूर्ण वैभव का अंबार लगा हुआ है, उतना ही उसे व्यक्ति को बड़ा माना जाता है । महत्व दिया जाता है । यह धर्म और महापुरुषों का अपमान करने के समान है । यह प्रयास मानवीय मूल्यों को कुचलने के समान है । मुनि कमलेश ने कहा महापुरुषों के सिद्धांतों के अनुसार जितना बड़ा त्याग है, विनय, सेवा, सरलता, सादगी और भक्ति से अंतरंग में जितना ज्यादा लीन है वह उतना ही महान है । संत ने कहा धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक क्षेत्र में मानवीय मूल्यों के दर्शन दुर्लभ हो रहे हैं । उनका सम्मान नहीं मिल रहा है । उचित स्थान नहीं मिल रहा । उपेक्षा और अनदेखा किया जा रहा है । इस कारण से मानवीय मूल्यों का पतन हो रहा है ।
जैन संत ने कहा अन्याय अनीति से धन पद प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले अहंकार के नशे में मानवता को पांव तले रोंदने वाले को सम्मानित करना तथा न्याय नीति पर चलने वाले व्यक्ति को अनदेखा करना धार्मिक सिद्धांतों के साथ में खिलवाड़ करने के समान है द्य जैन संत ने कहा जितने भी धर्म के महापुरुष हुए हैं उन्होंने मोह माया को ठोकर मारी द्य जितना बड़ा त्याग किया उतने ही विश्व में पूजनीय और आदर्श बने द्य धार्मिक जाजम पर भी मानवीय मूल्यों का पतन होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है द्य पन्नाधाय, चेतक घोड़ा, गुरु गोविंद सिंह के पुत्र रामकृष्ण, बुद्ध, मीरा, नानक तुलसी, कबीर उनके पास में क्या था ? आज दुनिया उनको क्यों श्रद्धा से देख रही है ? उनके सिद्धांतों को अपनाने वाले को धर्म स्थल पर अग्रिम पंक्ति में लेंगे तब ही मानवीय मूल्यों की स्थापना होगी द्य अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर से सेवा से परिपूर्ण हरिजन सेवक धर्मस्थल में काम करने में सामान्य लोगों को सरकार के मंत्री की भांति उनको सम्मानित किया गया । जैसे देखने वाले के और सम्मानित होने वालों के आंसू छलक पड़े ।
दिवाकर मंच महिला शाखा राष्ट्रीय सहमंत्री सरोज कावडिया, बेगू आशा शाह, राजकोट दिवाकर मंच तमिलनाडु शाखा के अध्यक्ष शीतल कोठारी का संघ की ओर से सम्मान किया गया । सक्षम मुनि के छह उपवास हैं । घनश्याम मुनि के तीन उपवास का पारणा किया गया द्य कौशल मुनि ने मंगलाचरण किया । अक्षत मुनि ने विचार व्यक्त किया । तमिलनाडु दिवाकर की खुशबू, विनोद खिवेसरा ने जीवदया का संकल्प लिया।