
रतलाम, 21 अगस्त। प्रभु तो जीव मात्र के प्रति करूणा रखते है। जीव की विराधना से परमात्मा की विराधना होती है। तीन काल में, तीनों लोक में तीर्थंकर की वाणी किसी भी जीव की विराधना का उपदेश नहीं देती और यही तीर्थकर की वाणी को मापने का पैमाना भी है। हिंसा का इसमें कोई स्थान ही नहीं है।
यह बात रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि हर जीव के प्रति मैत्री का भाव ही जिन शासन की विशेषता है। सामायिक हो, तप हो या अन्य कोई भी साधना हो, सभी में जीव मात्र के कल्याण का भाव निहित है। वर्तमान में लोग पार्टियों में समय और पैसा नष्ट करते है, तो ये पुण्याई का उपयोग नहीं, अपितु दुरूपयोग है। मनुष्य का भव मिला, जिन शासन मिला और सुनहरा समय मिला है, तो इसे पापों में नहीं गवाना चाहिए।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि मनुष्य जितना पापों में डूबता है, उतना नरक में जाता है। पुण्य और भाग्य से मिले जीवन का सदुपयोग किया जाए, तो ये सफल हो जाएगा। जीवन को सौभाग्य मानने वाला ही आराधना से जुडता है। रतलाम में चातुर्मास के दौरान तप आराधना कर कई श्रावक-श्राविकाएं जीवन को धन्य कर रहे है। आरंभ में उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने संबोधित किया। इस दौरान सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8 एवं महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे।
मासक्षमण तपस्वी 75 वर्षीय कांताबेन पितलिया का बहुमान
मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य प्रवर्तकश्री प्रकाश मुनिजी मसा ठाणा-2, महासती श्री चन्दनबाला जी मसा एवं महासती श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8 के पावन सानिध्य में 75 वर्ष की आयु में कांताबेन-बसंतीलाल पितलिया ने 31 उपवास कर मासक्षमण का दीर्घ तप पूर्ण किया। श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में चातुर्मास आयोजन समिति एवं श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट की और से उनका बहुमान किया गया। अन्य तपस्वी बहनों ने श्रीमती पितलिया को अभिनंदन पत्र, शाल एवं श्रीफल भेंट किया। इस दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। संचालन आयुष गंग ने किया।