दो परिवारों ने दुख की घड़ी में लिया मानवता का बड़ा निर्णय, नेत्रदान कर दिया सेवा-संस्कार का संदेश


रतलाम। मानव जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि जीवन के बाद भी किसी के काम आने में है। इसी मानवीय भावना को चरितार्थ करते हुए रतलाम के दो परिवारों ने अपने प्रियजनों के निधन के पश्चात नेत्रदान का पुनीत निर्णय लेकर समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। घनश्याम दास कल्याणी एवं प्रो. डॉ. श्रीवल्लभ जोशी (एस.एम. जोशी) के नेत्रदान से मानव सेवा की एक ऐसी मिसाल कायम हुई, जो लंबे समय तक समाज को प्रेरणा देती रहेगी।
घनश्याम दास कल्याणी का नेत्रदान
गांधी नगर निवासी घनश्याम दास कल्याणी के असामयिक निधन के पश्चात उनके परिवार ने नेत्रदान का पुनीत निर्णय लिया। गिरधारीलाल वर्धानी एवं संजय नेनानी की प्रेरणा से घनश्याम दास कल्याणी के पुत्र रामदयाल कल्याणी, देवेन्द्र कल्याणी एवं हासू कल्याणी सहित परिजनों ने नेत्रदान की सहमति प्रदान की।
परिवार के इस निर्णय ने यह संदेश दिया कि अपनों को खोने के दुख के बीच भी मानवता के लिए लिया गया एक छोटा-सा निर्णय किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाले की उम्मीद बन सकता है।
प्रो. डॉ. एस.एम. जोशी का नेत्रदान
दूसरा नेत्रदान राजस्व कॉलोनी निवासी प्रोफेसर डॉ. श्रीवल्लभ जोशी (एस.एम. जोशी) के असामयिक निधन के पश्चात उनके परिवार द्वारा किया गया। काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविन्द काकानी की प्रेरणा से उनके पुत्र अंशुमन जोशी एवं परिजनों ने नेत्रदान की सहमति प्रदान की। दोनों परिवारों के इस निर्णय ने समाज को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि मृत्यु जीवन का अंत हो सकती है, लेकिन मानव सेवा की भावना का अंत नहीं होना चाहिए।
नेत्रदान बना सेवा का संस्कार
दोनों परिवारों ने यह साबित किया कि नेत्रदान केवल एक व्यक्ति का निर्णय नहीं, बल्कि परिवार की सोच और संस्कारों का प्रतिबिंब है। ऐसा संस्कार आने वाली पीढ़ियों को भी मानव सेवा के लिए प्रेरित करता है।
अपने प्रियजन को खोने का दर्द किसी भी परिवार के लिए बेहद कठिन होता है, लेकिन दोनों परिवारों ने इस कठिन समय में भी मानवता को सर्वोपरि रखते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। उनके इस निर्णय से किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटने की नई उम्मीद जगी है।
समय पर सूचना से सफल हुआ नेत्रदान
नेत्रम संस्था के हेमन्त मूणत ने बताया कि दोनों परिवारों की सहमति मिलते ही बड़नगर गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही डॉ. ददरवाल तत्काल रतलाम पहुंचे और नेत्रदान की संपूर्ण प्रक्रिया विधिवत रूप से संपन्न कराई। परिजनों की तत्परता और सकारात्मक सोच के कारण दोनों नेत्रदान की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकी। यह नेत्रदान जरूरतमंद लोगों के जीवन में उजाले की नई उम्मीद जगाने का माध्यम बनेगा।
समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश
इन दोनों परिवारों ने अपने आचरण से समाज को संदेश दिया है कि नेत्रदान मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करने का एक महान माध्यम है। यदि परिवार समय पर निर्णय ले और जागरूकता के साथ आगे आए, तो किसी जरूरतमंद के जीवन में प्रकाश लाया जा सकता है।
नेत्रदान के लिए सहयोग एवं प्रेरणा
इन पुनीत नेत्रदानों में परिवारों को प्रेरित करने में गिरधारीलाल वर्धानी, संजय नेनानी एवं गोविन्द काकानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं नेत्रदान की प्रक्रिया को समय पर संपन्न कराने में डॉ. जी.एल. ददरवाल का विशेष सहयोग रहा।
परिजनों का सम्मान
नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात नेत्रम संस्था, काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन एवं गीता भवन न्यास की ओर से दोनों परिवारों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा इस पुनीत कार्य के लिए परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी के वाइस चेयरमेन मनीष रावल, हेमन्त मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, गोविन्द काकानी, शलभ अग्रवाल, गिरधारीलाल वर्धानी, संजय नेनानी, भगवान ढलवानी, राकेश अग्रवाल, , अरविंद व्यास, सुशील उपाध्याय, गणेश शंकर आचार्य, जयदीप जैन, कृष्ण गोपाल आचार्य, मधुसूदन पंड्या, दीपक शर्मा, जयंत उपाध्याय, हिरेन्द्र परमार एवं शैलेन्द्र सोलंकी सहित अन्य उपस्थित रहे।