
इंदौर। दलाल बाग के विद्या सुधा देशना मंडप में आयोजित धर्मसभा में मुनि पुंगव श्री सुधासागरघ जी महाराज ने प्रवचनब देते हुए जीवन में लक्ष्य, पुरुषार्थ, आत्मनिरिक्षण और गुरु के महत्व पर प्रेरणादायी मार्गदर्शन दिया।
मुनि श्री ने कहा कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए सबसे पहले लक्ष्य निश्चित होना चाहिए। केवल रास्ता जानना पर्याप्त नहीं है, यह भी पता होना चाहिए कि जाना कहाँ है। उन्होंने कोल्हू के बैल का उदाहरण देते हुए कहा कि वह दिनभर चलता है, शरीर थक जाता है, लेकिन मंजिल पर नहीं पहुँचता। यही स्थिति उस व्यक्ति की है जो जीवनभर मेहनत करता है, लेकिन अपने लक्ष्य को निश्चित नहीं करता।
महाश्रमण ने कहा कि परिवार, नौकरी या समाज में बार-बार यह सोचना कि मैंने इतना किया, मुझे क्या मिला? व्यक्ति के पुरुषार्थ को कमजोर कर देता है। इसके बजाय स्वयं से पूछिए मैं क्या बन रहा हूँ?और मेरी मंजिल के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा क्या है?अपनी कमजोरी, मोह, भय, अहंकार, अपेक्षा और कषाय का ईमानदारी से आत्मनिरीक्षण आवश्यक है।गुरु के सामने बिल्कुल बालक बन जाइए। जो अनुभव हो रहा है, वही सच-सच बताइए।
जिस प्रकार डॉक्टर से बीमारी छुपाने पर सही उपचार नहीं हो सकता, उसी प्रकार गुरु से अपने दोष और अनुभव छुपाने पर आत्मिक उपचार संभव नहीं है। मुनि श्री ने आगे कहा कि शरीर की थकान विश्राम से दूर हो सकती है, लेकिन मन की हार व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। मन का हारा व्यक्ति मुश्किल से सचेत होता है। इसलिए परिस्थितियों किसी भी हों जीवन में जिंदा रहना है तो आशाओं के दीप जलाए रखना।
जीवन में केवल चलना नहीं, सही दिशा में चलना महत्वपूर्ण है। लक्ष्य निश्चित कीजिए, अपनी बाधाओं को पहचानिए, गुरु के सामने निष्कपट रहिए और निरंतर पुरुषार्थ करते हुए अपनी वास्तविक मंजिल की ओर बढ़ते रहें। अंतरराष्ट्रीय भजन गायक सुधीर जी व्यास ने मुनि श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा अपना प्रख्यात भजन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर चक्रवर्ती अध्यक्ष आकाश आलोक कोल नवीन गोधा, हुकमचंद जैन काका, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोशी, महामंत्री हर्ष जैन, पत्रकार संजय पटौदी राकेश विनायका, डॉ. विशाल जैन, पत्रकार राहुल सेठी,राजेश जैन दद्दू, विपुल बाझलं भूपेंद्र भोपाली सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि कोकिला बेन हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने भी धर्मसभा में उपस्थित होकर मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।