देर रात तक चला अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन







रतलाम 17 अक्टूबर। नगर निगम द्वारा 11 से 20 अक्टूबर तक आयोजित 10 दिवसीय श्री कालिका माता नवरात्री मेले के छटें दिन बीती रात आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को किया हंसा-हंसाकर किया लोटपोट।
सोनभद्र उत्तर प्रदेष से आये कवि कमलेष राजहंस ने अपनी कविता सुनाते हुए कहा-
1- मेरे अहले वतन अपने तिरंगे की हिफाजत में
झुके कंधों पे मैं इस देश का भूगोल ढोता हूं
मेरी औलाद खाकर गोलियां सरहद पे सोती है
पसीना ओढ़ कर मैं खेत की मेड़ों पे सोता हूं
2- मेरे अहले वतन अपने तिरंगे की हिफाजत में
झुके कंधों पे मैं इस देश का भूगोल ढोता हूं
मेरी औलाद खाकर गोलियां सरहद पे सोती है
पसीना ओढ़ कर मैं खेत की मेड़ों पे सोता हूं
कोटा राजस्थान से आये कवि अर्जून अल्हड़ ने अपने कविता पाठ में कुछ यंू कहा –
विश्वपटल पर भारत मां की शान तिरंगा प्यारा है ।
सरहद पर खड़े सपूतों की ये जान तिरंगा प्यारा है ।।
इस धरती से जाकर जिसने चूमा चंदा मामा को ,,,,
जय जवान जय किसान जय विज्ञान तिरंगा प्यारा है ।।।
देष की राजधानी दिल्ली से आई कवियत्री रजनी अवनी ने कविता सुनाते हुए कहा-
1- कल तक घर के भीतर थी अब कदम बढ़ना सीख गई
लाख रुकावट आये फ़िर भी आगे जाना सीख गई
नारी को कमजोर समझना भूल तुम्हारी हैं सुन लो
नारी तो अब सूरज से भी आँख मिलाना सीख गई
2-एक सा सिलसिला नहीं होता
वक्त का कुछ पता नहीं होता
इश्क में मंजिले होती है मग़र
रास्तो का कुछ पता नहीं होता
टूंडला से आये कवि लटूरी लट्ठ ने अपनी कविता सुनाते हुए कुछ यूं कहा-
वो हिंदी के बल सारी दुनियां डोल लेता है।
अंग्रेजी तो पउआ पीकर भी बोल लेता है।
न जाने क्यों इतनी मिठास है अपनी भाषा में
क्या बोलने से पहले मिश्री घोल लेता है।
मंदसौर से आये कवि मुन्ना बैट्री ने अपनी कविता में कहा कि –
राजपूती क्षत्राणीयों के तेवर को क्या जानोगी।
तुम महफिल की नुमाइश हो गौहर को क्या जानोगी
आन बान और शान के खातिर जो ज्वाला में लीन हुई
दो कोड़ी की धूर्त नचनियां जौहर को क्या जानोगी
मुम्बई से आये कवि सुनील व्यास ने अपनी कविता पाठ करते हुए कहा कि –
अजीब सौदा है इस पेट की आग का भी यारों…
वो कमाने निकला था, और खुद ही खर्च हो गया।
गाँव के मोड़ पर बूढ़ी आँखें आज भी ताकती हैं,
उन्हें क्या पता, उनका बेटा शहर की भीड़ का हिस्सा हो गया।
इटावा उत्तर प्रदेष से आये कवि गौरव चौहान ने अपनी कविता में कहा कि –
1-ना ही किसी मज़हब न खुदाओ पे टिका है
ना तो ये सियासत की ख़ताओं पे टिका है
भारत के दुश्मनों में नहीं दम जो हिला दें
ये मुल्क शहीदों की चिताओं पे टिका है
2-यहाँ अपनों के बिना, कोई त्योहार नहीं खिलता।
वो चूल्हे की रोटी, वो मक्की का आटा,
वो माँ के हाथों का, प्यार भरा चांटा।
छाछ की वो ठंडक, गुड़ की वो डली,
याद आती है आज भी, वो बचपन की गली।
रतलाम के कवि धमचक मुल्थानी ने अपनी कविता सुनाते हुए कहा-
1-मोदी जी कह रहे हैं, ना खाऊंगा ना खाने दूंगा
मतदाता कह रहा है मोदी जी, जब तक पन्द्रह लाख खाते में नहीं आते
मैं तुमको जाने नहीं दूंगा, मैंने एक मतदाता से पूछा –
तेरे खाते में पन्द्रह लाख आएंगे, क्या तुझे यकीन है
वह बोला- मोदी है तो मुमकिन है ।
2-पूरी दुनिया में अपनी, अकड़ रखो
दो काम कम करोगे तो चलेगा
बस रघुनन्दन की उंगली पकड़ रखो
3-महाकाल का मजा मंडे के साथ
छुट्टी का मजा संडे के साथ
प्रयाग का मजा पंडे के साथ
पुलिस का मजा डंडे के साथ
अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन का संचालन कवि लटूरी लठ्ठ ने किया। प्रारंभ में आमंत्रित कवियों का स्वागत नेता पक्ष भगतसिंह भदौरिया, सामान्य प्रशासन समिति प्रभारी धर्मेन्द्र व्यास, राजस्व समिति प्रभारी दिलीप गांधी, महापौर परिषद सदस्य अक्षय संघवी, मनोहरलाल राजू सोनी, क्षेत्रिय पार्षद योगेश पापटवाल, पार्षद रणजीत टांक, धीरजकुवंर राठौर, एल्डरमेन मंगल लोढ़ा, हेमन्त राहौरी, गोपाल शर्मा आदि ने श्री कालिका माता के चित्र का प्रतीक चिन्ह भेंट कर व माला पहनाकर किया।