




रतलाम 18 अक्टूबर । सेवा भारती रतलाम द्वारा श्री बुद्धेश्वर हॉल, सागोद रोड पर आयोजित कन्या पूजन समारोह में समाज का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में 1600 से अधिक कन्याओं और 500 से अधिक समाजजनों ने सहभागिता की। समाज के विभिन्न वर्गों से आए लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को भव्यता और आत्मीयता प्रदान की। कार्यक्रम का उद्देश्य कन्याओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ उनके शिक्षा, संस्कार, स्वावलंबन और सशक्तिकरण के प्रति समाज की जिम्मेदारी को रेखांकित करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ चिकित्सक एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशा सराफ, विशिष्ट अतिथि विकास कटारिया एवं श्रीमती श्वेता विंचुंकर उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री विक्रम जी ने आदि रहे ।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में सेवा भारती अध्यक्ष अनुज छाजेड़ ने संबोधित करते हुए सेव भारती रतलाम की गतिविधियों पर प्रकाश डाला तथा कहा कि सेवा भारती रतलाम शिक्षा एवं संस्कार, स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक समरसता के विभिन्न आयामों में निरंतर कार्यरत है। संस्था का उद्देश्य सेवा को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना और समाज के सहयोग से जरूरतमंदों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। समारोह में मिली व्यापक सहभागिता ने इन प्रयासों के प्रति समाज के विश्वास और सहयोग को रेखांकित किया।
डॉ. आशा सर्राफ ने अपने उद्बोधन में कन्याओं के समुचित पालन-पोषण, शिक्षा और ज्ञान के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को आगे बढऩे के अवसर देना और उनमें आत्मविश्वास विकसित करना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सेवा भारती रतलाम के सेवा कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने संस्था के कार्यों हेतु रू.25,000 की सहयोग राशि देने की घोषणा की।
श्री विकास कटारिया ने सेवा भारती द्वारा विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला स्वावलंबन एवं सामाजिक समरसता के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने समाज के बीच रहकर जरूरतमंदों तक सेवा पहुँचाने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे कार्यों में सामाजिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।
श्रीमती श्वेता विंचुंकर ने भारतीय संस्कृति में महिलाओं की गौरवशाली भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में नारी को सदैव शक्ति, ज्ञान और सृजन का प्रतीक माना गया है। उन्होंने सेवा के माध्यम से बालिकाओं को शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की सशक्त बालिकाएँ ही आने वाले समय में परिवार, समाज और राष्ट्र की मजबूत आधारशिला बनेंगी।
मुख्य वक्ता श्री विक्रम जी ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में सेवा और दान के बीच के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सेवा का मूल भाव निस्वार्थ समर्पण है। सेवा किसी पर उपकार जताने या उसका श्रेय लेने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और ईश्वर के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को स्वयं को सेवा कार्य का कर्ता मानने के बजाय एक माध्यम समझना चाहिए, जिसके द्वारा समाजहित का कार्य संपन्न हो रहा है। उन्होंने सेवा को ईश्वर के कार्य के रूप में देखते हुए बिना किसी स्वार्थ और अहंकार के समाज के लिए कार्य करने का संदेश दिया।
समारोह के दौरान मंचासीन अतिथियों द्वारा नौ कन्याओं का प्रतीकात्मक पूजन किया गया। इस अवसर पर कन्याओं के सम्मान, उनके उज्ज्वल भविष्य और समाज में महिलाओं की सशक्त भूमिका का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित समाजजनों ने भी इस भाव को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन मोहित कसेरा ने किया। आयोजन के संयोजक शीतल भंसाली ने अतिथियों, कन्याओं, अभिभावकों, सहयोगियों और उपस्थित समाजजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा भारती के कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों से समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि कन्या पूजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि बेटियों को सम्मान, शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन प्रदान करने की सामाजिक प्रतिबद्धता है।