स्त्री रोग विशेषज्ञ’ के स्थान पर ‘स्त्री स्वास्थ्य विशेषज्ञ’ शब्द अपनाने की अपील

जावरा। शब्दों का हमारे समाज की सोच और दृष्टिकोण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसी दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण विचार सामने आया है कि जब स्त्री स्वयं कोई रोग नहीं है, तो उसके उपचार से जुड़े चिकित्सक के लिए ‘स्त्री रोग विशेषज्ञ’ शब्द के स्थान पर ‘स्त्री स्वास्थ्य विशेषज्ञ’ शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय जैन दिवाकर विचार मंच के वरिष्ठ मार्गदर्शक एवं समाजसेवी अभय सुराणा ने कहा कि स्त्री केवल एक परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और सृष्टि की महत्वपूर्ण धुरी है। वह मां, बहन, बेटी और पत्नी के रूप में अनेक रिश्तों को स्नेह, त्याग और समर्पण से जोड़ती है। ऐसे में उसके स्वास्थ्य से संबंधित चिकित्सा विशेषज्ञता को ऐसे शब्दों से संबोधित किया जाना चाहिए, जो सम्मान और सकारात्मक सोच को प्रकट करें।
इस विषय पर अभय सुराणा की बात का समर्थन करते हुए श्रीमती मधुबाला चोपड़ा रेखा सुराणा किरण पावेचा प्रतिभा लोढा सपना जैन खुशबू दंड मंजू हरण शिल्पा जैन ज्योति गंगवाल माया वागरेचा कीर्ति ओसवाल पमिता भंसाली नेहा लोढा प्रविशा सुराणा ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि हमारी मानसिकता और सामाजिक सोच का प्रतिबिंब भी है। समय के साथ शब्दों में सकारात्मक बदलाव लाना आवश्यक है। स्त्री के स्वास्थ्य, सम्मान और गरिमा को ध्यान में रखते हुए ‘स्त्री स्वास्थ्य विशेषज्ञ’ जैसे शब्द को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
अभय सुराणा ने राजनीतिज्ञो समाजसेवी, चिकित्सा जगत, पत्रकारों और जागरूक नागरिकों से अपील की कि इस विचार पर गंभीरता से चिंतन करें और सकारात्मक शब्दावली को अपनाने की दिशा में पहल करें।
नारी का सम्मान केवल विचारों से नहीं, बल्कि हमारी भाषा और व्यवहार से भी झलकना चाहिए।