स्वच्छता ही धर्म का प्राण है-अभय सुराणा

जावरा। स्थानकवासी जैन संघ हल्लदकेरी के तत्वावधान में जैन स्थानक भवन में चल रहे ‘पटाखा हटाओ, पर्यावरण बचाओ’ साप्ताहिक अभियान में राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश ने आतिशबाजी से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण, गंदगी और पशु क्रूरता पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि आतिशबाजी से निकलने वाला सैकड़ों टन कचरा नालियों, गलियों और बाजारों में गंदगी फैलाता है। इससे बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ती है और स्वच्छता अभियान की भावना को ठेस पहुंचती है। जब गंदगी फैलाने वालों को सरकार दंडित करती है, तो आतिशबाजी की गंदगी पर मौन क्यों?
राष्ट्र संत ने कहा कि आतिशबाजी का जलता कचरा जहां गिरता है, वहां आग का खतरा पैदा होता है। इससे मनुष्य, पशु-पक्षी और प्रकृति के अनेक जीव प्रभावित होते हैं, जनहानि और धनहानि होती है।
पशु क्रूरता पर आक्रोश व्यक्त करते हुए अंतर्राष्ट्रीय जैन दिवाकर विचार मंच के वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा ने कहा कि कुछ नादान लोग कुत्तों जैसे निर्दोष प्राणियों की पूंछ पर पटाखे बांधकर उन्हें भयभीत करते हैं। जान बचाने भागते ये जीव असहनीय पीड़ा सहते हैं। यह पशु क्रूरता नियमों का खुला उल्लंघन है। प्रशासन को इस पर कड़ी रोक लगाकर दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। निर्दोष प्राणियों को यातना देकर आनंद लेना मानवता के नाम पर कलंक है।
अभय सुराणा ने आगे कहां कि स्वच्छता धर्म का वास्तविक प्राण है और स्वच्छता ही हमारा असली आभूषण है। दीपावली पर भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव के उपलक्ष्य में उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन हो रहा है, साथ ही 108 पूच्छीसुनं की साधना चल रही है। 6 से 8 नवंबर तक सामूहिक तेले की तपस्या होगी। कार्यक्रम में सक्षम मुनि और अक्षत मुनि ने मंगलाचरण किया, कौशल मुनि ने विचार व्यक्त किए।