तीर्थंकर के गुणों से युक्त 1008 नाम के मंत्रो से सुख शांति,सम्रद्धि ओर खुशहाली आती है

झुमरीतिलैया। जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर1008 भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव के पूर्व दिवस के पावन अवसर पर श्री दिगम्बर जैन समाज के अंतर्गत श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर से गुरुदेव मुनि श्री108 सुयश सागर जी मुनीराज ससंघ गाजे बाजे के साथ श्री दिगम्बर जैन नया मंदिर, झुमरी तिलैया पहुँचे जहाँ पर आज दि.7/11/26 को जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर 1008 श्री महावीर भगवान के मस्तक पर पूज्य गुरुदेव मुनि श्री108 सुयश सागर जी मुनीराज के मुखारबिंद से 1008 नामों के द्वारा भगवान का महमस्तिकाभिषेक किया गया जिसमें सैकड़ो श्रद्धालु भक्तों के माध्यम से विश्व शांति की कामना गई ।शांतिधारा भगवान की पूजन के साथ मुनि श्री का मंगल प्रवचन हुवा जिसमे मुनि श्री ने कहा कि आज चारों तरफ युद्ध की विभिषिका से हो रही हिंसा, अशांति और अमानवीय व्यवहार से जल्द छुटकारा मिले ओर शांति स्थापित हो ऐसी भावना भायी जाती है।
भगवान के गुणों से युक्त 1008 नाम की जाप से सर्वत्र सुख शांति समृद्धि और खुशहाली के साथ आरोग्य की मंगल कामना की जाती है।
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी का पावन दिन धन्यतेरस का शुभ दिन है।इस दिन भगवान के समोसरण में महावीर स्वामी का अंतिम उपदेश भव्य जीवों को प्राप्त हुआ था। अंतिम शुक्लध्यान की तैयारी के लिए भगवान योगनिरोध को प्राप्त हुए।
इसलिए ये तिथि भी धन्य हो गई कि हमें आज वीर प्रभु की दिव्यध्वनि अंतिम बार सुनने मिली।इसलिए सभी भक्त आज धन्य तेरस मनाते हैं।इसको सफल बनाने में समाज पदाधिकारी गण ,विरागोदय वर्षायोग समिति के संयोजक गण के साथ पूरा समाज इस विशेष आयोजन में शामिल हुवा। पं अभिषेक जी शास्त्री के निर्देशन में कार्यक्रम सम्पन्न हो रहा है।उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा,नविन जैन ने दिया।

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