मटका भी ठोक बजा कर लेते हैं तो जीवन निर्माण के लिए सद्गुरु का चयन बहुत सोच समझ कर करना चाहिए – राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश

चोटिला अजरामर जैन उपाश्रय। अधूरा डॉक्टर खतरे से खाली नहीं होता है वह तो तन का ही नुकसान करता है लेकिन अधूरा गुरु मिल जाए तो सब कुछ स्वाहा हो जाता है । उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने सुधर्म समवशरण अजरामर जैन उपाश्रय मैं संबोधित करते कहा कि मटका भी ठोक बजा कर लेते हैं तो जीवन निर्माण के लिए सद्गुरु का चयन बहुत सोच समझ कर करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हजारों साल तक मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे में बैठ सकते हैं आस्था से दर्शन कर सकते हैं लेकिन शंकाओं का समाधान और नए ज्ञान का प्रकाश सद्गुरु से ही संभव है।
मुनि कमलेश ने स्पष्ट कहा कि निष्पक्ष और निस्वार्थ भावों से ओतप्रोत जिनकी निगाहों में मिट्टी सोना समान है वही सच्चा संत है।
जैन संत ने बताया कि विलासिता और संत जीवन में 36 का आंकड़ा है विश्व बंधुत्व की भावना साकार करने वाला सच्चा संत होता है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि पंथ और संप्रदाय की जंजीरों में केद करके मानवता टुकड़े टुकड़े करने वाला संत भी शैतान से कम नहीं है।
महासती भावीता बाइ ने कहा कि राष्ट्रसंत जैसे क्रांतिकारी विचार ही समाज और देश को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं चौटाला मे 3 जुलाई को जैन एकता सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है ।

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