रतलाम । साधन भक्ति करते-करते ही साध्य भक्ति सिद्ध होती है। जिसकी मृत्यु सुधरती है उसका अगला जन्म सुधरता है। मानव जीवन की अंतिम परीक्षा उसकी मृत्यु है।
उक्त उद्गार राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भागवताचार्य परम एवं रामायण प्रवक्ता पंडित श्री योगेश्वरजी शास्त्री ने व्यक्त किए। श्री सागरेश्वर महादेव शनिमंदिर के विशाल परिसर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा श्रवण कराते हुए आपने कहा कि जब मानव प्रत्येक क्षण को सुधारता हैं तब उसकी मृत्यु सुधरती है। गई हुई संपत्ति वापस आ सकती है किन्तु विगत समय वापस नहीं है। प्रत्येक क्षण का जो सद्पुयोग करेगा उसकी मृत्यु मंगलमय होगी। कण-कण और क्षण-क्षण को सुधारों तो जीवन मंगलमय बनेगा। समस्त जीवन परमात्मा के स्मरण में बितेगा अंत समय में उसी स्वरूप का ध्यान आएगा। उक्त जानकारी सूरजमल टांक ने देते हुए बताया कि पंडित श्री सुरेन्द्रजी दुबे की स्मृति मेंं कथा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 4 बजे चल रही है। संगीतमय भागवत कथा मकर संक्रांति तक चलेगी। आज 12 जनवरी को कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। आज व्यासपीठ पर पूजन यजमान गोपालजी कुमावत एवं प्रितेश राठौर ने की। जानकारी सूरजमल टांक ने दी।