
- निश्रा-शासन प्रेमी मुनिप्रवर श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.
- आगामी गुरुसप्तमी महापर्व का लाभ धिरजमलजी परमार संजान वाले को मिला
- स्थानिय ग्रामीण स्कूल के बच्चों का भोजन आयोजन किया गया एवं मुनिश्री द्वारा उद्बोधन दिया गया








प.पू.विश्ववंदनिय जगत पूज्यनिय दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी म.सा.की 195 वीं जन्म जयंती तथा 115 वीं स्वर्गगमन जयंती गुरुसप्तमी महापर्व का दो दिवसीय आयोजन प.पू.मालवरत्न शासनप्रभावक मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. प.पू.मुनिश्री जीतचंद्र विजयजी म.सा. आदि ठाणा की तारक निश्रा में तप जप ध्यान भक्ति आराधना के साथ धूमधाम से मनाया गया।
08 जनवरी को गुरुभगवंतो का मंगल प्रवेश सामैया के साथ श्री पार्श्व राजेंद्रसूरी रिलीजियस ट्रस्ट मंडल दहाणु के सभी ट्रस्टी गण एवं उनकी श्राविका तथा सैकड़ों गुरु भक्तों के साथ वाजते गाजते मारवाड़ी परंपरानुसार धुमधाम से हुआ।
मंत्राधिराज श्री पार्श्वनाथ प्रभु नेमिनाथ दादा के एवं दादागुरु के दर्शन वंदन कर गुरु दरबार मे धर्मसभा आयोजित हुई ।श्रीसंघ ने गुरु वंदन किया पश्चात प.पू.मधुरवक्ता मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.ने मंगलाचरण कर गुरु महिमा पर प्रासंगिक सारगर्भित प्रवचन दिये । मुनिश्री ने कहा दादा गुरुदेव राजेंद्र सूरीजी पराक्रमी क्रांतिकारी एवं धैयवान थे। जावरा में क्रियोद्वार कर क्रांति का शंखनाद करते सबको चौकाया। चुस्त संयम पालन जिनाज्ञानुसार शासन प्रभावना एवं कुक्षी व चामुंड वन मोदरा के प्रसंग में विशिष्ट पराक्रम से सबको अचंभित किया । अपने धैर्य गुण से अनेको संघो की एकता कराई,अनेकों राजा ,दरबान व ठाकुरों को गुण संपन्न बनाया, धर्म से जोड़ा। दोप.से श्री राजेंद्र वंदनावली का संगीतमय आयोजन किया गया जिसमें भक्ति पदों के साथ सुरि राजेंद्र महिमा का जन्म से लेकर दीक्षा व आचार्य पदवी तक के कई प्रसंगों को श्रवण कराया। रात्री में भक्ति भावना की धुम मचाने पधारे नागदा ज.के दिलीप सिसोदिया मुंबई के जाने-माने संचालक भरत एन.कोठारी व प्रकाश माली एडवोकेट ने जोरदार रंग जमाया। गांवसांझी महिला चौविसी एवं मेहंदी वितरण किया गया। पोष सुदी छट की गुरु आरती का लाभ राकेश बोराणा देसूरी को प्राप्त हुआ। देर शाम तक खचाखच भरे भक्ति हांल में भक्तों ने भक्ति का आनंद उठाया।
09 जनवरी पौष सुदि सप्तमी के शुभ दिन शुभ मुहूर्त में दादा गुरुदेव के चरणों में 108 महाभिषेक किये गये। पहले चरण का लाभ रमेशजी बागरा वाले । दुसरे…… तिसरे….. चौथे चरण का लाभ…… परिवार को मिला। वार्षिक अखंड दिपक का लाभ…. को मिला । वार्षिक आयंबिल का लाभ श्री चमनलालजी चोपड़ा भीनमाल वालों की पांचो सुपुत्रियां को मिला। प्रभु को चांदी की नुतन आंगी….. द्वारा एवं गुरुदेव को नुतन चांदी की आंगी रखबचंदजी मीठालालजी सौलंकी परिवार द्वारा चढ़ाई गई। परोपकार सम्राट आचार्यदेव श्री ऋषभचंद्र सूरीजी के चित्र की स्थापना शा.रखबचंदजी मिठालालजी सोलंकी सियाणा वालो ने कि । प्रातः का नाश्ता महिपालजी की और से एवं दोनों समय के स्वामीवात्सल्य का लाभ जावंतराजजी बोराना देसूरी वालों की और से था, आप परिवार ने इस मौके पर चांदी का छत्र एवं स्वर्ण चैन दादा गुरुदेव श्री को अर्पण की। वार्षिक अष्टप्रकारी पूजा के चढ़ावे एवं 11 माह की सुदि सातम को पूजन एवं भाता के आदेश की विविधि गुरुभक्तों ने सुंदर बोली बोलकर लाभ लिया। दोप.में श्री राजेंद्रसुरी गुणानुवाद सभा आयोजित हुई ।पूज्य मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी ने गुरुदेव श्री के तप संयम साधना का सुंदर वर्णन सुनाते हुए कहा नदी कुआं आदि सभी के लिए उपकारी होते हैं। वैसे गुरु भी सभी पर उपकार करते हैं,गुरु दीपक जैसे सभी को प्रकाश देते हैं,गुरु पुष्प जैसे सभी को सुवास देते हैं,गुरु सूर्य जैसे सभी को आलोकित करते हैं, गुरु जहाज जैसे सभी को पार लगाते हैं आदि सुंदर विशेषण द्बारा गुरुवर्णन किया। मुनिश्री जीतचंद्र विजयजी ने भी गुणानुवाद किया। धर्मसभा में पू.मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. के 25 वर्ष संयम रजत जयंती की स्मारिका का विमोचन उज्जैन के परम गुरुभक्त श्री नरेन्द्रजी-संगीताबेन सोगानी ,पूत्र निरज-मेघा सोगानी सूर्यंश एवं निधि द्वारा किया गाया। ट्रस्ट मंडल के ट्रस्टी नयमलजी भंडारी भरत भाई-भूपेश भाई सौलंकी उत्तमजी बाफना सुरेशजी अंबानी रमेशजी चंदन मुकेशजी हितेशजी रणावत महिपाल आदि ने एवं जावतराजजी बोराणा ,धिरजमलजी ,राकेशजी बोराणा ,ललित शक्ति ,भरत कोठारी जेसल वोरा द्वारा भी विमोचन हुआ। सभी लाभार्थियों व विमोचन कर्ता परिवार का ट्रस्ट ने बहुमन किया। रात्रि में भक्ति की धूम मची। गुरु सप्तमी की रात्रि आरती का लाभ गोरेगांव के आदर्श भाई को प्राप्त हुआ।