
रतलाम । शिव कृपा के बिना सिद्धी प्राप्त नहीं होती है। भगवान शिव निवृत्ति धर्म के आचार्य हैं और प्रवृत्ति धर्म के आचार्य श्रीकृष्ण हैं। उक्त उद्गार श्री सागरेश्वर महादेव के विशाल परिसर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य प्रवर परम पूज्य गुरु, रामायण प्रवक्ता पंडित श्री योगेश्वर शास्त्री ने व्यक्त किए। आपने बताया कि सब प्रकार प्रवृत्ति में होने पर भी प्रवृत्ति का जरा भी रंग न लगे इसका आदर्श भगवान श्रीकृष्ण ने जगत को दिखाया हैं। अनेक में एक का दर्शन करना यही सिद्ध भक्ति हैं। और जो सब जगत पर प्रभु का दर्शन करें वह उत्तम वैष्णव है। जो अपने ईष्टदेव में परिपूर्ण भाव रखता है वह परम भाव शुद्धि मानी गई है। बालकृष्ण की सेवा से सभी देवों की पूजा सिद्ध होती है। आपने कहा कि पंच देव आराधना का वैष्णव धर्म है। यह शरीर पंचतत्व से रचा हुआ है। उक्त जानकारी सूरजमल टांक ने देते हुए बताया कि दस दिवसीय संगीतमय श्री भागवत भागवत कथा में आज श्रीकृष्ण उत्सव बड़े ही उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया। नंद पर आनंद भयो, जसायो ने जायो लल्ला आदि भजनों पर भक्तगण इतने आनंदित हो गए कि खुशी के साथ भावविभोर होकर नृत्य करने लगे। यजमान सोनू राठौर ने स्थापित देवता का पूजन कर व्यासपीठ की पूजा अर्चना की।