संत की पहचान वेश संप्रदाय, बाहरी कर्मकांड से नहीं उसके निर्मल विचारों से होती है – राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

अहमदाबाद साबरमती 16 जनवरी 2021 । प्राणी मात्र के प्रति सद्भाव और प्रेम की भावना से ओतप्रोत होने वाला सच्चा संत है उक्त विचार राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश ने दीक्षार्थी रीना जैन के समारोह को संबोधित करते कहा कि नफरत करने वाले के साथ भी वात्सल्य भाव रखें यही साधना का सार है।
उन्होंने कहा कि संत की पहचान वेश संप्रदाय, बाहरी कर्मकांड से नहीं उसके निर्मल विचारों से होती है।
मुनि कमलेश ने बताया कि निस्वार्थ भाव से स्व और पर के कल्याण में अंतः करण से से समर्पित होता है उसे मोक्ष प्राप्त होता है।
मूर्ति पूजक आचार्य ने कहा कि धर्म टकराव नहीं समन्वय भाव सिखाता है अपनी अपनी परंपरा का पालन करते हुए दूसरों की परंपराओं का सम्मान करें यही धर्म का मुख्य लक्ष्य है।
आचार्य श्री कल्याण बोधी सु रीश्वर जी ने राष्ट्रसंत का अभिनंदन करते हुए कहा कि ऐसे सुलझे हुए विचार के संत तही समाज को दिशा दे सकते हैं इतना ही नव दीक्षित को मंगल आशीर्वाद और पात्र प्रदान करवाए दीक्षा समारोह में 70 छे 86 गुरु भगवंत और महासती ने भाग लिया भारी संख्या में जनता उमड़ पड़ी।

Play sound