रतलाम । आज का इंसान जो चीज सफेद करना चाहिये उसे तो काला कर रहा है, जबकि उसे काले को सफेद करना चाहिये इंसान एक उम्र के बाद अपने सफेद बालों को डाई लगाकर कर काला करने लगता है, लेकिन वो कर्म काले कर रहा है जबकि उसे सफेद (उजले) पुण्य करना चाहिये।
बोलचाल की भाषा में प्राय: यह कहा जाता है की खाली हाथ आए है और खाली हाथ जाना है, लेकिन ये अर्धसत्य है लेकिन जब इस दुनिया में आते है या दुनिया से जाते है तब जीवनकाल में जो भी पूण्य या पाप उपाजर्न किया है वो साथ लेकर आते है और साथ लेकर जाते है। इंसान जीवन में हमेशा अच्छे से अच्छा कमाना चाहता है तो साथ ही साथ पुण्य भी कमाओ क्योंकि वो ही तो साथ में जाएगा।
ऊपरवाला जब हमें इस दुनिया में भेजता है तो हमारी डायरी में तीन पन्ने देकर भेजता है, जिसमें पहले पन्ने पर वो हमारा जन्म लिखता है, व अंतिम पन्ने पर मृत्यु लिख देता है, ये दोनों उसके हाथ में है वो निश्चित है लेकिन बीच का पन्ना वो पूरा खाली छोड़ता है वो होता है हमारे जन्म और मृत्यु के बीच का जीवन उस पन्ने को हमें भरना होता है, अब ये हमारे हाथ में है की उस पन्ने पर हम अपने कर्मों से अपने कार्यों से क्या लिखते है।
भगवान ने पुण्य कमाने के बहुत सी गलियां बताई है जिधर जाओ वँहा पुण्य मिल सकता है, छोटी सी नवकारसी के नियम से भी 100 साल का नरकबन्ध का आयुष्य कम होता है। एक बार नरक में जाना पड़ गया तो कम से कम 10000 वर्ष का आयुष्य औऱ अधिकतम 33 सागरोपम का नारकीय भुगतना पड़ेगा, इसलिये पुण्य की कमाई करते रहो ताकि भले ही अभी पंचमकाल में मोक्ष नही मिले लेकिन गति तो सुधरेगी और कभी न कभी तो मोक्ष की प्राप्ति होगी।
10 साल से 60-60 साल हो गए प्रवचन सुनते सुनते लेकिन अभी भी आप भाटे पर बैठे है पाटे पर कब आओगे ये चातुर्मास काल फिर स आपके द्वार पर खड़ा है आप जीवनभर अपनी मर्जी से जीते है चातुर्मास में सन्त सतियों की सुन लो उनका कहा मान लो जीवन सँवर जाएगा।
हमें दुनिया को नही बदलना है केवल अपने आप को बदलना है कयोंकि जबतक खुद के जीवन में परिवर्तन नही आएगा तब तक उद्धार होने वाला नही है।
अपनी मधुर वाणी में यह प्रवचन शतावधानी पूज्या श्री अरुण प्रभा जी म.सा. ने भगतपुरी में श्रेणिक जी कटारिया के नवीन भवन पर प्रदान किये। संघ प्रवक्ता ने बताया की सोमवार दिनाँक 27 को महासतीजी भगतपुरी से विहार करके तेलियों की सड़क स्थित मणिलाल अमृतलाल कटारिया के निवास पर पधारेंगे एंव प्रवचन प्रात: 09 से 10 करमचंद जी के उपाश्रय हनुमान रुंडी के पीछे होंगे।