जीवन को सुखमय और तनाव रहित बनाने के लिए मौन और मुस्कान बहुत जरूरी है -महामुनी 108 विशल्य सागर जी

झुमरीतिलैया (कोडरमा) । पानी टंकी रोड स्थित जैन मंदिर में अपने चातुर्मास प्रवास मे जैन संत महामुनी 108 विशल्य सागर जी गुरुदेव ने आज अपने सारगर्भित प्रवचन में कहा कि वाणी का संयम बहुत जरूरी है वाणी को वीणा बनाओ, वान नहीं । आज घर-घर में महाभारत वाणी में अपशब्दों के प्रयोग से ही होती है । संबंधों को मधुर बनाए रखने के लिए अच्छा प्रिय संबोधन जरूरी है । जीवन को सुखमय और तनाव रहित बनाने के लिए मौन और मुस्कान बहुत जरूरी है, जीवन को स्वर्ग बनाना है तो दिमाग को ठंडा रखिए, और जुबान को नरम रखिए, शब्द के प्रयोग से ही आग लगता है और शब्द के प्रयोग से बाग लगता है, हमें अपने आत्मा मे छुपे गंदगी को बाहर निकालना है और विशुद्धि को प्राप्त करना है।
प्रात: दीप प्रज्वलन का सौभाग्य सुरेश झाझंरी, नरेंद्र झाझंरी सिद्धार्थ झांझरी परिवार को मिला सभी ने मिलकर गुरुदेव के चरण का पाद प्रक्षालन किया और शास्त्र भेंट किया, नेमी देवी, प्रेम, बिना झाझंरी परिवार के लोगों ने समाज के साथ मिलकर गुरुदेव के चरणों में रत्नों के साथ पूजा की, मंगलाचरण और मंच संचालन कार्यक्रम के संयोजक सुरेंद्र जैन काला, आशा गंगवाल और अलका दीदी ने किया मौके पर समाज के सैकड़ों भक्तजन मीडिया प्रभारी नवीन जैन राजकुमार अजमेरा मौजूद थे ।

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