आशीर्वाद–क्षमा भाव के साथ

  • वक्त पर ना मांगी गई क्षमा,
  • एक वक्त के बाद..
  • वक्त-वक्त पर चुभती है..!

सम्मेदशिखर। मैं एक अदना सा वीतराग पथ का पथिक हूँ। प्रतिपल मुझसे अज्ञान की दशा में, अहंकार की हुंकार में, अविवेक की क्रियाओं में, भ्रम की मूर्च्छा में, कुछ ना कुछ भूल से, प्रमाद के वश गल्तियाँ हो जाती है। कई बार इनका भान होता है, तो कई बार अहंकार इनका संज्ञान नहीं होने देता।
आज के इस भावनात्मक क्षमा पर्व पर, मन के मैल को धोने के प्रसंग पर, इस मांगलिक सामुहिक क्षमाभाव के त्यौहार पर, *मुझ अकिंचन द्वारा, सहधर्मी साधु-साध्वीयों के प्रति, जो मेरी सेवा में, आहार भक्ति में संलग्न हैं, एवं भक्त परिवार से जाने-अनजाने में हुई भूलों को, अपने अन्तर्मन से, अन्तर्मना को क्षमा प्रदान करके, अपने भगवान बनने के मार्ग को प्रशस्त करेंगे।
सबसे क्षमा – सबको क्षमा
ॐ नमः
अन्तर्मना
आचार्य प्रसन्न सागर
12 सितंबर, 2022
स्वर्ण भद्र कूट सम्मेदशिखर पर्वत
संकलन कर्ता-कोडरमा मीडिया राज कुमार अजमेरा

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