राजनीतिज्ञ और मीडिया का दायित्व

अशोक मेहता, (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)
इंदौर

राजनीति मैं आने वाले सभी महानुभाव यह कहते हैं कि उन्होंने अपना जीवन जन सेवा को समर्पित कर दिया और कई राजनीतिज्ञ ने वाकई में ऐसा ही किया। पर ऐसे समर्पण भाव वाले इक्का-दुक्का ही रहे और राजनीति को अपना व्यवसाय समझने वालों की भीड़ बढ़ती गई। कई बार जनता भी अपनी जागरूकता भूल गई और ऐसे लोगों को राजनीति गुरु बनाने लगी जो गुंडागर्दी और पावर का उपयोग कर चुनाव जीत गए। कई मौको पर सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलो ने अपने नैतिक मूल्यों को भूल कर ऐसे तत्वों को सत्ता में जोड़ लिया जोकि अपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे और कई दल बदलू को भी जोड़ा। यह सब लोग अपना दायित्व को भूल चुके हैं। आज के दौर में अधिकांश राजनीति में आते वक्त बहुत बुरी आर्थिक स्थिति में थे और अब वे आर्थिक रूप से अत्यंत मजबूत स्थिति में है। चुनाव लड़ना भी एक बड़ा इन्वेस्टमेंट का काम हो गया और जीतने पर उस इन्वेस्टमेंट को मय प्रॉफिट के साथ वापस पाने के लिए करप्शन में डूबने जरूरी हो गया।
मीडिया का भी दायित्व है कि बुराई को उजागर करें भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ आवाज उठाएं। आम जनता पर अत्याचार ना होने दें किसी भी तरह की ज्यादती कर कोई किसी का फायदा नहीं उठा सके सरकार गलत रास्ते पर हो तो उसे आइना दिखा सके पर कुछ ही मीडिया हाउस इस बात पर खरे उतरे। बाकी तो छोटे-बड़े कई मीडियाकर्मी ने अपने इस कार्य को अनैतिक तोर की कमाई का जरिया बना लिया वे लोगों को डराने लगे और यह बात भी सही है कि डरता वही है कि जो गलत होता है। मीडिया कर्मी का दायित्व है कि ऐसे लोगों से समझौता कर पैसे ना लें उन्हें ब्लैकमेल ना करें बल्कि उन्हें उजागर करें।
अच्छे समाज की रचना तभी संभव होगी जब यह सब लोग अपना दायित्व ईमानदारी से निभाएं।

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