सकल जैन समाज के तत्वावधान में जनआक्रोश सभा में व्यक्त किए विचार

अजमेर, 20 जुलाई । संत किसी पंथ या परम्परा का होने से पहले भगवान महावीर का है। भगवान महावीर का उपासक हर संत समाज के लिए अनमोल है। हम अपने मतभेद भूल एकता के सूत्र में बंधना होगा। एक होकर हमे अपने संतों की सुरक्षा के लिए आवाज बुलंद करनी होगी। संतों की सुरक्षा करना सरकार व समाज का दायित्व है। संत बचेंगे तो हमारी संस्कृति व सभ्यता सुरक्षित रहेगी। ये विचार गुरूवार को दिगम्बर जैन संत कामकुमार नंदी की निर्मम हत्या के विरोध में अजमेर के सकल जैन समाज की ओर से आयोजित जन आक्रोश रैली के बाद नया बाजार चौपड़ में जनआक्रोश सभा में पार्श्वनाथ कॉलोनी वैशालीनगर में चातुर्मासरत मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा ने व्यक्त किए। सभा में सेवारत्न हरीश मुनिजी म.सा. ने कहा कि महावीर के संत किसी भी परम्परा के हो वह हमारे लिए पूजनीय है। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने का संदेश देते हुए कहा कि जीवन में संगठन की जीत होती है ओर संगठन से समाज मजबूत होता है। अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले कामकुमार नंदी जैसे संत की हत्या निंदनीय और चिंतनीय है। संत चाहे श्वेताम्बर हो या दिगम्बर परम्परा का उसकी रक्षा हमे करनी होगी। मधुर व्याख्यानी श्री हितेश मुनिजी म.सा. ने कहा कि पूज्य कामकुमार नंदी की हत्या जैन संत की हत्या न होकर पूरे समाज की हत्या समान है। संत के विहार के समय भी उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार व समाज की है। राजमार्गो पर भी विहार कर रहे संतो के लिए अलग लेन होनी चाहिए ताकि उनके जीवन की दुर्घटनाओं से रक्षा हो सके। तीर्थ बचाने से पहले संत बचाने की जरूरत है। संत बच गए तो तीर्थ भी बच जाएंगे लेकिन संत ही नहीं बचे तो तीर्थ बचाकर क्या करेंगे। जन आक्रोश सभा में मंच पर दिगम्बर जैन आचार्य विवेकसागर जी म.सा., सद्भाव सागर जी म.सा., संकल्पसागर जी म.सा. का भी सान्निध्य व मार्गदर्शन मिला। वैशालीनगर संघ के सचिव पीएम जैन (डोसी) ने बताया कि चातुर्मास के तहत प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे तक नियमित प्रवचन के साथ दोपहर 3 से 4 बजे तक धर्मचर्चा हो रही है। सूर्यास्त के समय प्रतिक्रमण के बाद रात्रि धर्म चर्चा का आयोजन भी हो रहा है। चातुर्मास में प्रत्येक शनिवार को प्रवचन के बाद महिलाओं की एवं रविवार दोपहर एक से तीन बजे तक बच्चों की धार्मिक कक्षा एवं प्रतियोगिता का आयोजन होगा।