जिनेन्द्र धर्म की दृढ़ भक्ति करने पर संसार में नहीं लगेगा किसी प्रकार का भय- समकितमुनिजी

  • भय मुक्त होने पर मन से दूर हो जाती सभी प्रकार की शंकाए
  • आदिनाथ सोसायटी पारख धर्मसभा मण्डप में भय निवारण आगम आराधना

पूना, 27 जुलाई । जिसने जिनेन्द्र धर्म के प्रति दृढ़ भक्ति व आस्था रखी उसे इस संसार में किसी प्रकार का भय नहीं होता है। जो भय से मुक्त हो जाता है उसके मन की सभी प्रकार की शंकाए भी दूर हो जाती है। जिनशासन में आस्था रखने वाला व्याधि, रोग, बुढापा, मौत किसी भय से भयभीत नहीं होकर निर्भय रहता है। सब दान में सर्वोपरी दान भयमुक्त करने वाले अभयदान को माना गया है। ये विचार पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में पारख धर्मसभा मण्डप में गुरूवार को श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाश म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने आगम आराधना के दौरान व्यक्त किए। हर गुरूवार को नियमित प्रवचन के शुरू में आधे घंटे होने वाली इस आराधना के तहत इस बार भय निवारण करने वाली आगम गाथाओं का उच्चारण किया गया। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे परीक्षा के नाम से इतना भयभीत हो जाते है कि जो आ रहा होता है उसे भी प्रश्नपत्र हल करते समय भूल जाते है। इसी तरह बड़ो के मन में भी कई तरह के भय समाए रहते है। बच्चों से लेकर बड़ो तक सभी को भयमुक्त करने का माध्यम है आगम की ये गाथाएं है जिनका नियमित उच्चारण करना चाहिए। इससे समस्या के समाधान का मार्ग अवश्य मिलता है ओर जीवन भयमुक्त बनता है। पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए ये आगम गाथाएं रामबाण औषधि है। मुनिश्री ने कहा कि आगम हम बताते है कि जीवन के लिए क्या सही ओर क्या गलत है। इसमें जो सही है उनकी विधि बताई गई है ओर निषेध भी बताया है। इनकी जानकारी होकर आगे बढ़ना जीवन का सौभाग्य होता है। धर्मसभा में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने भजन ‘मां तेरे चरणों में स्वर्ग है हमारा’ की प्रस्तुति दी। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल श्री भवान्तमुनिजी म.सा.,सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा.,सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में मैसूर से आए सुश्रावक प्रकाश मारू सहित पूना के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। धर्मसभा का संचालन आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। चातुर्मासिक प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक हो रहे है। चातुर्मास के तहत आत्मकल्याण के लक्ष्य से सर्वोतभद्र चौमुखी जाप आयोजन भी प्रतिदिन रात 8.30 से 9.30 बजे तक हो रहा है।
पेट भूखा रह सकता पर मन की भूख खत्म नहीं होती
समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि आहार संज्ञा पर विजय पाना सबसे कठिन होता है। सामान्यत शरीर एक-दो समय से अधिक निराहार नहीं रह पाता है। चातुर्मास में इस आहार संज्ञा पर विजय पाने का प्रयास होता है। उन्होंने कहा कि पेट भूखा रह सकता है पर मन की भूख खत्म नहीं होती है। सवाल एक-दो दिन बिना खाए रह सकने वाले पापी पेट का नहीं बल्कि पापी मन का है। मुनिश्री ने कहा कि आगम में भोजन करने के छह कारण भूख मिटाने, सेवा के लिए, जीव रक्षा के लिए, संयम आराधना के लिए, जीने के लिए ओर धर्म के लिए बताए गए है। उन्होंने कहा कि हमे सोचना है कि हम किसके लिए भोजन कर रहे है। हम स्वाद के लिए भोजन कर रहे है या स्वास्थ्य के लिए। कुछ चीजे स्वादिष्ट होती पर शरीर के लिए हानी देती है ओर कुछ चीजों का स्वाद इतना अच्छा नहीं लगता पर उससे शरीर स्वस्थ रहता है। हम जानते है कई चीजे अच्छी नहीं है फिर भी स्वाद के कारण उन्हें नहीं छोड़ पाते है। मुनिश्री ने कहा कि हमेशा भोजन करते समय उसके बनाने वाले की प्रशंसा करे ओर कभी भी भोजन में मीन-मेख नहीं निकाले। कई बार शादियों में जिसने जिंदगी की पूरी कमाई लगाके भोजन बनाया होता है उसमें भी हम कमियां निकालने से बाज नहीं आते है। ऐसा भोजन हमारे शरीर में भी जलन पैदा करेगा ओर साताकारी नहीं होगा।
कल से तीन दिवसीय मौन साधना
चातुर्मास में प्रत्येक चतुर्दशी पर होने वाली लोगस्स महापाठ के तहत 31 जुलाई को लोगस्स आराधना व मांगलिक होगा। इससे तीन दिन पूर्व शुक्रवार से रविवार तक पूज्य समकितमुनिजी म.सा. के मौन साधना रहेगी। इस दौरान प्रवचन से लेकर सुबह 11.30 बजे तक तथा शाम 4 से 5 बजे तक का आगार रखते हुए मौन साधना रहेगी। मुनिश्री ने कहा कि लोगस्स पाठ में अनंत तीर्थंकरों की शक्ति व उर्जा समाई हुई है। इससे बढ़कर पावन व पावरफूल दूसरा कोई पाठ नहीं हो सकता।
श्रावक व्रत दीक्षा समारोह रविवार को
चातुर्मासिक आयोजन के तहत 30 जुलाई को श्रावक व्रत दीक्षा समारोह का आयोजन होगा। समकितमुनिजी ने कहा कि हम पांच महाव्रत की पालना नहीं कर सकते है तो व्रति श्रावक तो बने। श्रावक के सभी 12 व्रत स्वीकार नहीं कर सकते तो कम से कम श्रावक के मूलव्रत पांच अणुव्रत में से कम से कम एक व्रत तो जरूर स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि परिवार सहित इस आयोजन में आकर अन्य श्रावकों को फोन कर उन्हें भी इस श्रावक व्रत दीक्षा समारोह से जुड़ने की प्रेरणा दे। ये व्रत ऐसे है जो सामान्य जीवन में बिना किसी विशेष व्यवधान के आसानी से पूर्ण किए जा सकते है। इसी दिन मासखमण की पचक्खावनी के माध्यम से तप की अनुमोदना भी होगी।
बच्चें करेंगे 15 दिवसीय द्रव्य मर्यादा तप
चातुर्मास में 30 जुलाई रविवार से 13 वर्ष तक के बच्चों के लिए 15 दिवसीय द्रव्य मर्यादा तप (चन्द्रकला तप) शुरू होगा। ये बच्चों को जिनशासन से जोड़ने के लक्ष्य से ऐसी तप साधना होगी जो बच्चें स्कूल जाते भी आसानी कर सकेंगे। इस साधना के तहत बच्चों के लिए द्रव्य मात्रा निर्धारित होगी यानि वह एक दिन में उस तय द्रव्य मात्रा से अधिक द्रव्यों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। दैनिक दिनचर्या में जरूरी चार चीजों पानी पेस्ट, दूध व दवा में किन्ही तीन चीजों की छूट (आगार) रहेगी। तप के तहत पहले दिन 30 जुलाई को द्रव्य मर्यादा तप की विधि सम्पन्न कराई जाएगी एवं इस दिन अधिकतम 15 द्रव्य उपयोग में लेे सकेंगे। इसी तरह 31 जुलाई को अधिकतम 14 द्रव्य एवं निरन्तर घटते क्रम में तप साधना के अंतिम दिन 13 अगस्त को एक द्रव्य का ही उपयोग कर सकेंगे।