नई दिल्ली।महावीर देशना समिति दिल्ली की ओर से 18 दिवसीय पयुर्षण पर्व मनाया गया। परमपूज्य युवाचार्य महेंद्रऋषिजी महाराज साहब इन्होंने दशलक्षण धर्म संबंध में अपने प्रवचन में चर्चा की। तद्नुसार उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य एव उत्तम ब्रह्मचर्य यह दस गुण या दश लक्षण है। 23 अगस्त से 1 सितंबर यानी भाद्रपद शु। पंचमी से अनंत चतुर्दशी तक, हम लगातार दस दिनों के प्रवचन का सार दे रहे हैं।
हमारे आचार्य, तीर्थंकर ने क्षमा को इतना प्रभावी ‘हथियार’ दिया है कि दुनिया में इसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। आज के विज्ञान के युग में, बड़े से बड़े हथियारों का आविष्कार किया गया है, लेकिन माफी जैसी कोई चीज नहीं है। क्षमा का अमृत पीने की परंपरा हमारे जैन धर्म में है। आज दश लक्षण त्योहारों की शुरुआत में आने वाला पहला त्यौहार है। उत्तम क्षमा से ब्रह्मचर्य इन दस गुणोंके अलावा जग में उत्तम ऐसा कुछ भी नही। आज हम पूरी दुनिया को हिंसा से पीड़ित देखते हैं। दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं। अपप्रवृत्ती का बल हिंसा है, दुष्ट का बल हिंसा होती है। सत्ता शासक या राज्यकर्ता इनके सत्ता का बल दंड (शिक्षा) होता हैं। जो गुणी हैं, उनके लिए क्षमा शक्ति है। अगर कोई सही होना चाहता है, तो सात्विक लोग उसे माफ कर देते हैं और उसे सुधरने का मौका देते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि क्षमा किसी कमजोर व्यक्ति की निशानी है, लेकिन एक बात बहुत महत्वपूर्ण है, क्षमा मांगने में बहुत ताकत लगती है। उससे भी, क्षमा करने में अधिक शक्ति लगती है। क्षमा करना इतना आसान नहीं है। एक व्यक्ति भले ही नुकसान सह सकता है, लेकिन उसे माफ करने की जल्दी नहीं है। क्षमा एक ऐसा सेतू है जो किसी भी दूरी को मिटा सकता है, चाहे दूरी कितनी ही क्यू न हो। क्षमा दो प्रकार की होती है। क्रोध के कारण कटुता निर्माण हुवी होती है, उस वक्त की हुवी क्षमा, दूसरा.. कितनी ही विपरीत स्थिति आयी तो भी उससे विचलित न होते हुवे, चाहे वहा कितना भी प्रतिकूल क्यों न हो, बिना किसी हिचकिचाहट के सामना करना ही क्षमा है।
भगवान महावीर को बहुत कठिन परिस्थिति से गुजरना पड़ा लेकिन वह बिल्कुल भी विचलित नहीं हुए। अपने धैर्य और क्षमा के कारण ही वे वर्धमान से महावीर बन गए। उत्तम क्षमा यानी प्रेम, क्षमा यानी सहनशीलता। हमें अपने जीवन में क्षमा के पवित्र संदेश का अनुपालन करना चाहिए। आज सभी के लिए अपने मन की कड़वाहट को दूर करना और क्षमा की भावना जागृत करना महत्वपूर्ण होगा। कल के प्रवचन में हम उत्तम मार्दव इस गुण के बारे में चर्चा करेंगे।