शिक्षक मंच द्वारा डॉ. राधाकृष्णन की प्रतिमा पर माल्र्यापण कर कहा कि – दिव्य सात्विक और श्रेष्ठता से परिपूर्ण आचरणो को प्रतिपादित किया था डॉ. राधाकृष्णन ने

रतलाम । डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने विश्व की चारों दिशाओं में अपने पांडित्य का प्रताप और ज्ञान का प्रभाव स्थापित किया था अपने दिव्य सात्विक और श्रेष्ठता से परिपूर्ण आचरणो को प्रतिपादित किया था डॉ. राधाकृष्णन श्रेष्ठता की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अपनी सादगी पूर्ण जीवन शैली से संपूर्ण विश्व को एक संदेश दिया था कि व्यक्ति महान नहीं होता है उसके संस्कार और उसकी शिक्षा महान होती है । उन्होंने अपने शिक्षकों को सदैव ईश्वर का श्रेष्ठतम प्रतिनिधि मानते हुए उनके प्रति सदैव आदर और सम्मान का भाव रखते हुए अपने जन्म दिवस को समस्त शिक्षक समुदाय को समर्पित करते हैं उन जैसा महान दार्शनिक शिक्षाविद इस भूमंडल पर एक आदर्श के रूप में सदैव पूजनीय रहेंगे ।
उक्त विचार शिक्षक सांस्कृतिक संगठन द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर विकास खंड कार्यालय परिसर स्थित डॉ राधाकृष्णन की मूर्ति पर माल्यार्पण करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मुरलीधर चांदीवाला ने व्यक्त कि । इस भीषण समय में आपके विचार समूचे मानव जाति के लिए सुमधुर संगीत के समान है राधाकृष्णन वेद और वेदांत की प्रतीक थे उनकी सोच में गांधी और रविंद्र का गुंजन था हे मां सरस्वती के श्रेष्ठतम उपासक थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते डीपीसी अमर वरदानी ने कहा कि समस्त शिक्षक समाज डॉ. राधाकृष्ण के बताए हुए मार्ग पर चलकर देश पर आए हुए इस संकट में मानवता की सेवा मैं लगे हुए हैं आपने शिक्षक समाज द्वारा कोरोना महामारी के समय की गई प्रशासन को सेवाओं के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के विशेष अतिथि सहायक संचालक शिक्षा श्री लक्ष्मण देवड़ा ने कहा कि शिक्षक कभी भी ना शब्द का प्रयोग नहीं करता किसी भी काम को चुनौती के रूप मैं देश सेवा समझकर करता । पूर्व प्राचार्य शिक्षाविद् ओपी मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान प्रत्येक भूमिका में अपने आप को ढाल लेता है वही उसका सर्वश्रेष्ठ दिन जो समाज में से प्रतिष्ठा और सम्मान दिलाता हैं। सुलोचना शर्मा ने मंच की गतिविधियों को शिक्षकों के साथ-साथ छात्रों को जोड़कर आयोजित करने का अनुरोध किया। अशोक लोढ़ा ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन ने शिक्षक दिवस के रूप में शिक्षकों को अनुपम सौगात दी है । आरंभ में संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए मंच की गतिविधियों से अवगत कराते हुए शिक्षकों से आग्रह किया कि हम डॉ.राधाकृष्णन को अपने जीवन में उतार कर अपने अध्यापक की दायित्व का निर्वाह करें । इस अवसर पर सर्वश्री गोपाल जोशी, कृष्ण चंद्र ठाकुर, रमेश चंद्र उपाध्याय, नरेंद्र सिंह राठौर, राधेश्याम तोगडे, श्याम सुंदर भाटी, राजेंद्र सिंह राठौड़, रक्षा के कुमार, भारती उपाध्याय, आरती त्रिवेदी, कविता सक्सेना, वीणा छाजेड़, दशरथ जोशी, मिथिलेश मिश्रा, देवेंद्र सिंह वाघेला, दयाशंकर पालीवाल, मनोहर प्रजापति, अनिल जोशी, दिलीप वर्मा, विजय यादव, पंकज सांकला, ध्रुव कुमार पारखी आदि उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन दिलीप वर्मा तथा आभार राजेंद्र सिंह राठौड़ ने व्यक्त किया।