पंडित रत्न श्री नरेंद्र मुनि मसा का देवलोकगमन होना जैन दिवाकर परिवार के लिए बहुत बड़ी क्षति है

जावरा ( अभय सुराणा) । श्रमण संघीय जैन दिवाकर गुरुदेव श्री चौथमल जी मसा की उज्ज्वल परंपरा के निर्मल पवित्र संत पंडित रत्न श्री नरेंद्र मुनि मसा का इंदौर इमली बाजार महावीर भवन पर चार्तुमास के लिये विराजीत थे । आप श्री का 5 सितम्बर शनिवार को प्रात: ध्यान साधना करतें हुए अचानक देवलोक गमन हो गया यह सुनकर मन को भारी आघात लगा सच्चे मायने में दुर्लभ संतों में एक थे यश कीर्ति पद प्रतिष्ठा की लालसा से कोसो दूर सहज सरल व्यक्तित्व के धनी आत्मीयता से ओतप्रोत परम सेवाभावी छोटे-छोटे संतों की सेवा में भी आनंद की अनुभूति करते थे पश्चिम भारतीय प्रवर्तक गुरुदेव महाश्रमण श्री रमेश मुनि जी मसा के अंतेवासी शिष्य थे एक प्रेम का सागर हमसे दूर हो गया आगम मनस्वी कविरत्न प्रवर्तक गुरुदेव श्री विजय मुनि जी मसा, उपप्रवर्तक प्रखर वक्ता श्री चंद्रेश मुनि जी मसा, संस्कार मंच के प्रणेता सिद्धार्थ मुनि जी मसा, सेवाभावी श्री अभिजीत मुनी जी मसा, मधुर गायक श्री शालीभद्र मुनि जी मसा, महासती श्री कंचन कंवर जी मसा, महासती श्री किर्तीसुधा जी मसा, महासती श्री सुधाकुवंर जी म सा, सेवाभावी महासती जी देशना श्री जी मसा आदि ठाणा ने चार्तुमास काल मे बहुत सेवा का लाभ लिया प्रवर्तक श्री विजय मुनी जी म सा पंडित रत्न श्री नरेन्द्र मुनी जी मसा की सेवा मे सदा तत्पर रहते थे प्रवर्तक श्री स्वंय के द्वारा समय-समय पर दवाई देना एवं जो आवश्यक सेवा होती करतें रहते थे आप सभी संतों में भोले बाबा थे ।
इंदौर महावीर भवन श्रावक संघ के श्री नेमनाथ जैन, रमेश भंडारी, जिनेश्वर जैन, सुभाष विनायक्या, राजकुमार जैन आदि ने अंतर्मन से सेवा में समर्पित होकर अम्मा पिया के दायित्व का निर्वहन किया पंडित रत्न श्री नरेन्द्र मुनी जी मसा ने अपनें जीवन को स्वाध्याय एवं सेवाभाव के लिये समर्पित कर दिया था । आप कुशलता पुर्वक प्रवचनकार थे एंव आपने कई किताबों का लेखन भी किया आपनें प्रवर्तक श्री रमेश मुनी जी म सा की सेवा में रहतें हुए पुरे भारतवर्ष में चार्तुमास किये।
उक्त जानकारी देते हुए श्रावक संघ जावरा के पूर्व अध्यक्ष बंसती लाल चपडोद एवं पूर्व महामंत्री श्री संघ जावरा के सुजानमल कोच्चटा ने बताया कि आपका वर्ष 2011 का चार्तुमास जावरा था आप सभी साधु साध्वी की गोचरी पानी की सेवा में सदैव तत्पर रहते थे। आप सभी दर्शनार्थी को दयापालो सा कहकर दर्शनार्थी का मन प्रफुल्लित कर देते थै एसे महान संत के देवलोक होंने पर जैन दिवाकर परिवार एवं श्रमण संघ के लिए अपूरणीय क्षति है जिसे भरपायी असंभव है आप श्री के देवलोक गमन पर संदीप रांका, बाबुलाल ओस्तवाल, मदनलाल नाहर, दिपचंद डांगी, मनोहरलाल चपडोद, पारसमल बरडीया, बसंतीलाल चपडोद, धर्मचंद श्रीश्रीमाल, पुखराज कोच्चटा ,अजीत रांका, सुजानमल ओरा, मोहनलाल पोखरना, शांतीलाल दुग्गड, अनिल दुग्गड, रमेश चंद जैन एडवोकेट , श्रीपाल कोचट्टा, सुरेन्द्र कोच्चटा, सुरेश मेहता, सुरेन्द्र मेहता, सुजानमल कोच्चटा, अभय सुराणा, सुशील कोच्चटा, सुरेन्द्र मेहता, सुभाष टुकडीयाँ, दिलीप चत्तर,विनोद लुणीया, अशोक झामर, मोतीलाल मांडोत, वर्धमान मांडोत, शांतीलाल चपडोद, दिनेश पोखरना, राजेन्द्र ओस्तवाल, प्रकाश बोथरा,नरेन्द्र रांका, अशोक रांका, सुशील मेहता,जतिन कोचच्टा, विजय कोचच्टा, ज्ञानचंद ओस्तवाल, पारसमल ओरा, राजेन्द्र ओस्तवाल, विनोद ओस्तवाल ,अशोक गोरेचा, फतेहलाल बुरड, रुपेश दुग्गड, महेंद्र रांका, पुखराज भंडारी, विरेन्द्र रांका, अतुल मेहता, सुनिल मेहता संजय सुराणा, नितिन कोलन, पारस कोलन, आशीष चत्तर ,विशाल चत्तर ,आकाश जैन, मनीष पोखरना, वैभव ओस्तवाल, राहुल रांका, मनोज डांगी, सोरभ दुग्गड, पंकज श्री माल, संदीप जैन, कमलेश कटारिया, राकेश श्रीश्रीमाल, अंकुर जैन, राजशेखर भंडारी, संदीप श्रीश्री माल, गुरुभक्तो ने अपनी-अपनी श्रद्धांजलि कोविड-19 के निर्देशो के अनुसार दी गई । अन्तर्मन की गहराइयों के साथ भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।