दिगम्बर जैन मांगलिक भवन में जैन सतों का सगंम हुवा और सामूहीक क्षमा याचना हुई

दिगम्बर जैन मांगलिक भवन में जैन सतों का सगंम हुवा और सामूहीक क्षमा याचना हुई
जावरा (अभय सुराणा)। क्षमा वीरों का गहना है और क्षमा मांगने से अधिक दुष्कर क्षमा करना है विनम्रता मृदुभाषी का सरल व्यवहार और सदाचरण से विनय भाव उत्पन्न होता है जो क्षमा धर्म और क्षमा भाव का जन्म व्यक्ति के जीवन में लाता है आज आवश्यकता संगठित होने की है हम दिगंबर, श्वेतांबर, तेरापंथी, जैन स्थानक मार्गी बाहर से भले ही अलग-अलग रहे लेकिन सब महावीर की संतान है और जैन है । यह बात आज पुष्प वर्षा योग समिति द्वारा आयोजित सामूहिक क्षमावाणी समारोह में उपस्थित दिगंबर जैन आचार्य श्री प्रमुख सागर जी, रिश्तो तक गच्छ के श्री पुष्पेंद्र विजय जी वर्धमान स्थानकवासी दक्ष के उप प्रवर्तक श्री अरुण मुनि जी तथा तपोवन की साध्वी श्री विरल प्रभारी श्री जी ने एक स्वर में कहीं सभी ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आपने प्रेरक उपदेश दिए । इस अवसर पर आचार्य श्री प्रमुख सागर जी ने संपूर्ण जैन समाज को आव्हान किया कि उन्हें शासन से वर्ष में एक क्षमा दिवस घोषित करने हेतु प्रयास करना चाहिए जिससे जनसामान्य में क्षमा धर्म और जैन धर्म का प्रचार-प्रसार हो और सभी अपने जीवन का कल्याण कर सकें । इस अवसर पर सेवा श्री सुरेश मणि जी, मुनि श्री जनक विजय जी, मुनि श्री जीवन जीना भद्र विजय जी, एलक प्रभाकर सागर जी, एलक परमात्मा सागर जी सुन ले पुकार सागर जी प्रतिज्ञा श्री प्रीति श्री परीक्षा श्री व प्रेक्षा श्री माताजी भी मंचासीन थे। जावरा नगर में यह एक ऐतिहासिक प्रसंग था जब सभी संप्रदाय के साधु और श्रावक एक वक्त पर एक एक मंच पर एक जाजम पर उपस्थित थे । प्रारंभ में दीप प्रज्वलन इंदरमल दुकडिय़ाँ, मदन सिंह चोरडिय़ा, कनक मल चोर्डिया, पवन पाटनी, पवन कलसरधर ने किया । मंगलाचरण आकांक्षा और औरा तथा महक की आवाज ने किया । अतिथियों का स्वागत पुखराज सेटी, नरेंद्र गोदा, मनोज बारोट, अनिल कोठारी, जितेंद्र कोठारी, मयंक मादावत, तेज कुमार पाटनी, पंकज शाह आदि ने किया तथा आभार वर्षा योग समिति के प्रवक्ता रितेश जैन ने व्यक्त किया । कार्यक्रम का संचालन वर्षा योग समिति के महामंत्री विजय ओरा ने किया, इस अवसर पर सभी जैन समाज के प्रमुख महानुभव उपस्थित थे।