जो प्रभु के नाम के लिए निकलता है तो उसकी चिंता प्रभु ही करते है



रतलाम, 5 दिसंबर। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में मंगलवार से मुमुक्षु निखिल कुमार जैन के तीन दिवसीय संयम ग्रहण उत्सव की शुरूआत सूरजपोर ग्राउंड, जैन कालोनी में हुई। उत्सव के पहले दिन प्रातः 9 बजे उपकरण वंदनावलि का गीत संगीत के विवेचन के साथ अद्भूत कार्यक्रम हुआ। इसके साथ ही आचार्य श्री ने प्रवचन के माध्यम से कहा कि जो व्यक्ति प्रभु के नाम के लिए निकलता है तो फिर उसकी चिंता प्रभु ही करते है। हमें चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती है।
आचार्य श्री ने कहा कि हमारे जीवन में सुख की शुरुआत श्रवणवेश पहनने से हुई। यह शुभ में प्रवृत्त होने के लिए हमे वातावरण देता है और अशुभ में से निवृत्त करता है। जिस प्रकार सिर्फ काले कपडे़ पहनने से कोई वकील नहीं बनता। ठीक उसी प्रकार से श्रवणवेश पहनने मात्र से कोई साधु नहीं बन सकता है। आचार्य श्री ने अधिकरण, उपकरण और अंतकरण को परिभाषित करते हुए कहा कि अधिकरण वह है जो हमे दुर्गति की ओर ले जाए और उपकरण वो जो हमें सद्गति के समीप ले जाए। आपके घर में इन दोनों में क्या ज्यादा है। यदि अंतरण अधिकरण के पक्ष में बैठा तो दुर्गति निश्चित है और उपकरण के पक्ष में बैठ गया तो सद्गति निश्चित है। आचार्य श्री ने कहा कि दीक्षार्थी की संसार से आज रात भले ही एग्जिट होती है लेकिन संयम जीवन में उसकी एंट्री होती है।
आचार्य श्री की निश्रा में दोपहर 2.30 बजे महिलाओं के लिए मोहन टॉकीज में वस्त्र वधामणां आयोजित किया गया। उत्सव के दूसरे दिन 6 दिसंबर को सुबह 8 बजे वर्षीदान यात्रा निकलेगी। रात 8 बजे शासन स्पर्शना का आयोजन होगा। इसी दिन मुनिराज ज्ञानबोधि विजयजी म.सा. का 25 वें संयम वर्ष में प्रवेश होगा। तीसरे दिन 7 दिसंबर को मुख्य आयोजन सुबह 8.45 बजे दीक्षा विधि के साथ शुरू होगा। दीक्षा सम्पन्न होने के बाद साधर्मिक भक्ति का आयोजन किया जाएगा। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा धर्मालुजों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहने का आव्हान किया है।