

उदगांव/कोडरमा। भारत गौरव साधना महोदधि सिंहनिष्कड़ित व्रत कर्ता अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज एवं सौम्यमूर्ति उपाध्याय 108 श्री पीयूष सागर जी महाराज ससंघ का महाराष्ट्र के ऊदगाव का ऐतिहासिक चौमासा चल रहा है इस अवसर पर आज सभी महाराज की दीक्षा दिवस सौम्य मूर्ति उपाध्याय 108 पीयूष सागर जी मुनिराज के सानिध्य में दीक्षा दिवस मनाया गया इस अवसर पर अन्तर्मना ने सभी भक्तों को अपने प्रवचन में कहा की सर झुकाने से भगवान नहीं मिलते.. मन का झुकना बहुत जरूरी है…, मन कहाँ जल्दी से झुक पाता है, मन को समझाना बहुत कठिन काम है। पल-पल में बदलता है,, क्षण-क्षण में फिसलता है। एक पल में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ जाता है, तो एक पल में बंगाल की खाड़ी में उतर जाता है। मन हमेशा नशे में रहता है। मन पर कई तरह का नशा चढ़ा है –
पद का नशा, पैसे का नशा, प्रतिष्ठा का नशा, शक्ति का नशा, रूप का नशा, घर मकान का नशा ।
इस तरह दुनिया में सैकड़ों तरह के नशे होते हैं, जो मानव मन पर सवार हैं। इस मन पर अगर अब तक कोई नशा नहीं चढ़ा है, तो वह है प्रभु का नशा, भक्ति का नशा। एक बार यदि ये नशा चढ़ जाये तो फिर कभी उतरता नहीं है। शराब का नशा तो दिख जाता है, मगर रुपया-पैसा-रूप-सौन्दर्य और अहंकार का नशा जल्दी से दिखता भी नहीं है।
जब कभी भी रूपया-पैसा-रूप-सौन्दर्य, पद-प्रतिष्ठा का नशा सिर चढ़ने लगे तो कुछ मत करना – एक घन्टे मरघट में जाकर बैठ जाना, फिर सब नशा आपो-आप उतर जायेगा। आगे सभी मुनिराज को अपने उत्कृष्ट साधना की ओर बढ़ने का बहुत बहुत आशीर्वाद दिया। उक्त जानकारी कोडरमा राज कुमार अजमेरा, जैन मनीष सेठी ने दी।