काव्य मय फागोत्सव सम्पन्न

जावरा (अभय सुराणा) । अखिल भारतीय साहित्य परिषद जो कि साहित्य और संस्कृति को समर्पित राष्ट्रीय संस्था है द्वारा फागोत्सव का कव्यमय आयोजन दि 31 मार्च को जावरा संस्था के अध्यक्ष डॉ उपाध्याय के निवास पर किया गया । सर्व प्रथम मुख्य अतिथि श्री कानसिंह जी चौहान एवम अतिथि कवियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ गोष्ठी का शुभारंभ कवि राजेंद्र शोत्रीय की सु मधुर शारदे वंदना के साथ हुवा । गोष्ठी में ओज भरी कविता `हक है पहले उनका जिन्होंने दी है जिंदगी `नागदा के वीररस के कवि सुग्रीव गोरखपुरी ने सुनाई । मालवी की मिठास में रंग घोला नागदा के ही मीठे कवि राजेंद्र कांठेड़ ने `अबे तो हुदरी जाओ `और काव्य गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया वरिष्ठ कवि डॉ लक्ष्मीनारायण सत्यार्थी जी ने जब उन्होंने ` माय म्हारे कोख में क्यों मारे , काई थारो कियो मैं गुनाह मती लिख खून भरी कहानी ,हूं थारा प्यार की निशानी `सुनाकर श्रोताओं की आंखों में जलजले ला दिए । सुरेश रघुवंशी ने `मैं रंग हूं अपने देश का `और फजल हयात ने `क्या रिश्वत की भी कोई रसीद होती है ` सुनाकर श्रोताओं को आंदोलित कर दिया ।अब बारी थी श्रृंगार रस की जिसे बखूबी निभाया और जिया समारोह के विशिष्ट कवि श्री सुंदरलाल जोशी सूरज ने अपनी रचना `चहल पहल थी बाग में ,देख कली की चाल भंवरों ने जाकर कहा पल्लू ज़रा संभाल` । डॉ प्रकाश उपाध्याय ने अतिथियों के आत्मीय परिचय के साथ `कंठ नाद,प्रेम राग ,गीत फाग गाता हूं सांसों की सरगम पे बांसुरी बजाता हूं ` राग मालकौंस में सज्जित फाग गीत से सभी श्रोताओं का मन मोह लिया । कवि महोहर मधुकर ने अपने सु मधुर गीत से श्रोताओं को रस में डुबोया । हास्य कवि जैन ने हास्य की और अंत में शहर के वरिष्ठ कवि मनोहरा जी ने अपने व्यंग्य बाणों की पिचकारी छोड़कर श्रोताओं को खूब भिगोया । समारोह में अतिथि कवि श्री सुंदरलालजी सूरज और डॉ लक्ष्मीनारायण सत्यार्थी जी का शाल ,दुपट्टे , स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया । कार्यक्रम को अपनी गरिमामय उपस्थिति से एडवोकेट आई पी त्रिवेदी , सुरेश मेहता अनिल पावेचा , राम चचलनी ,डॉ ज्योति उपाध्याय ,भटनागर दंपत्ति ,दिलीप सेठिया , ओम मांद लिया,अभय श्रीवास्तव ,बांटी भाई ,हर्ष बो कड़े ,पोरवाल जी ,गोयल जी आदि ने गौरवान्वित किया । गोष्ठी का सुगढ़ संचालन कवि राजेंद्र शोत्रीय ने किया । अंत में आभार के साथ यादगार गोष्ठी का समापन हुआ ।