जावरा (अभय सुराणा) । धन सुविधा तो दे सकता है सुख नहीं सुख का साधन सिर्फ धर्म है धर्म आत्मा का स्वभाव है स्वभाव को कभी खोया नहीं जा सकता आत्मा को परमात्मा बनाना ही जीवन का लक्ष्य होना चाहिए धर्म उनकी संपदा है जो परिश्रम और संकल्प के धनी है संकल्प संयम एवं साधना के पुरुषार्थ के साथ धर्म मार्ग पर बढ़ते रहने से यह आत्मा मोक्ष गामी आत्मा बन सकती है पाप मार्ग से दुख, कष्ट एवं परेशानी का सामना करना पड़ता है जबकि धर्म मार्ग से सुख ,समृद्धि एवं खुशहाली आती है आत्मा को सुख प्रदान करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है सकारात्मक विचारों से मन की शुद्धि होती है और शुद्ध मन से आत्मा निर्मल होती है उक्त उदगार श्री संकेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर चौपाटी उपासरे पर आध्यात्मिक योगी जिनशासन गौरव पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनि जी म. सा. के सूशिष्य तपस्वी संत श्री अभय मुनि जी म. सा. ने एक महती धर्म सभा में व्यक्त किया आपने कहा कि संयम में सार है बाकी सब बेकार है संयमित जीवन व्यक्ति को उच्च शिखर पर पहुचाता है वही असंयमित जीवन व्यक्ति को रसातल में धकेलता है जिससे व्यक्ति पापचार में लिप्त हो जाता है धर्म सभा में श्री पवन मुनि जी म .सा .ने भी विचार रखें धर्म सभा की प्रभावना के लाभार्थी श्री राजमल चंदनमल खारीवाल एवं श्री विजय कुमार वीरेंद्र कुमार पामेचा रहे धर्म सभा का सफल संचालन श्री संघ के पूर्व महामंत्री सुभाष टुकड़िया ने किया धर्म सभा में श्री राकेश मेहता, राजमल खारीवाल, कांतिलाल खारीवाल, कनकमल चोरडिया, प्रदीप लूक्कड़, सम्रथमल ओस्तवाल ,पारसमल औरा, सुशील चपरोद, अनिल पोखरना ,शैतानमल दुग्गल, सुरेश ओस्तवाल, कमल चपलोद, सुभाष चौरडिया, विनोद लूनिया हसमुख सेठिया, अशोक झामर, पारस गादिया, राकेश ओस्तवाल, अशोक गोलेछा, अर्पित कोचट्टा, विजय झामर, आनंद रांका, कमल पारख, विनोद चपलोद के साथ श्री जैन दिवाकर महिला मंडल एवं राजेंद्र ऋषभ महिला मंडल की सदस्याए उपस्थित थी कल 7 अप्रैल रविवार को प्रात 9 से 10:30 बजे तक म. सा. के ओजस्वी प्रवचन होंगे संध्या को रतलाम दिशा में विहार की संभावना है ।