जो परमात्मा के शब्द पर आस्था जता लेता है वो परम तत्व को प्राप्त करने का सामर्थ्य जुटा सकता है – परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्री हितेशचंद्र सूरीश्वर जी म.सा.

जावरा (अभय सुराणा) । परमात्मा महावीर के द्वारा बताये गए मार्ग अनुसार धर्म संस्कृति जंहा पर, या धर्म संस्कार या परमात्मा की देशना से रोहिंया जैसे चोर भी अपने जीवन को परवर्तित करके परमात्मा के परम तत्व को प्राप्त कर सकते है जिन शासन के अंदर विश्वास और आस्था दो ही शब्द ऐसे है जो व्यक्ति के पूर्ववत कर्मो की निर्जरा भी करवाते है और वर्तमान के इस दौर के अंदर कही निकाचित कर्म से क्षय उपशम के साथ मे उसको तारने का एक संबल प्रदान करते है।क्योंकि परमात्मा के शब्द और अंश मात्र भी जो संशय करता है उनकी भव की परिभ्रमना बढती है जो परमात्मा के शब्द पर जो आस्था ही जता लेता है वो परम तत्व को प्राप्त करने का सामर्थ्य जुटा सकता है, जिनशासन के अंदर एक मात्र भगवान महावीर की देशना ऐसी है जिसमे ही शब्द का उपयोग नही किया गया सिर्फ भी शब्द का उपयोग किया।
उक्त प्रवचन पिपली बाज़ार मंदिर उपाश्रय में परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्री हितेशचंद्र सूरीश्वर जी म सा ने फरमाया इस अवसर पर मुनि दिव्यचन्द्र विजय जी म सा एवम मुनि वैराग्य यश विजय जी म सा ने भी संबोधित किया। श्रीसंघ द्वारा प्रभावना वितरीत कीगई। विनोद वरमेचा, भूपेंद्र रुणवाल, प्रकाश चोरडिया मोतीलाल चपडोद आदि उपस्थित रहे।