
पुणे 24 अप्रैल 2024 । एक पल की आध्यात्मिक साधना के सामने तीन लोक की संपत्ति भी तुच्छ है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा की समत्व योग की साधना सर्वोपरि साधना है उसे निर्मलता सरलता और वात्सल्य भाव का संचार होता है। उन्होंने कहा कि पंथ परिवेश परंपरा और कर्मकांड के माध्यम से साधक की साधना का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
मुनि कमलेश से बताया कि विश्व बंधुत्व की भावना को आत्मसात किए बिना धार्मिकता में प्रवेश नहीं हो सकता। साधना करने का सबको समान अधिकार है। जैन संत ने कहा कि साधना बल के के लिए गुरु का आशीर्वाद अत्यंत जरूरी है उसके सामने देविक शक्तियां भी नत मस्तक होती है।
उपाध्याय प्रवर श्री प्रवीण ऋषि जी ने राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश की 45 वीं दीक्षा दिवस पर निरंतर सफलता के लिए आशीर्वाद प्रदान करते हुए उज्जवल भविष्य की मंगल कामना की। उप प्रवर्तनी महासती चंदन बालाजी ने राष्ट्र संत का अभिनंदन करते हुए कहां की उनके महान कार्यों को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, प्रतिदिन नया इतिहास बनाते हैं। 25 अप्रैल को सादड़ी सदन गणेश पेठ पुणे में प्रातः 9:00 बजे वीरांगना सम्मान समारोह आयोजित किया जायेगा।
अखिल भारतीय एरवड़ा उपनगर में श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली युवा शाखा के पूर्वराष्ट्रीय अध्यक्ष सागर मलजी सांखला कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ कार्यकर्ता युगराज जी परलेचा दिवाकर मंच के राष्ट्रीय मंत्री चंद्रकांत लोड़ा संघ के संघपति प्रवीण फुलफकर सभी कार्यकर्ताओं मिलकर मुनि कमलेश को दीक्षा दिवस पर आदर की चादर समर्पित करके अभिनंदन किया गोदान और विद्या दान का संकल्प लिया।