
पुणे सादड़ी सदन 25 अप्रैल 2024 । धर्म के नाम पर भी अपने अंदर रही हुई सद्भावना समाप्त होती है वह धर्म भी अधर्म में परिवर्तन हो जाएगा । उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा कि किसी भी निमित्त से आत्मा की शांति भंग होती है परस्पर भेदभाव की दिवारे खड़ी होती है इससे बड़ा पाप और कोई नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि सद्भाव, प्रेम, एकता की नींव पर ही साधना और अहिंसा की मंजिल खड़ी की जा सकती हैं यही साधना का प्रवेश द्वार है । मुनि कमलेश से बताया कि बाहरी उपासना पद्धति का टकराव कट्टरता नफरत और हिंसा की जननी है ऐसे व्यक्ति को धार्मिक तो क्या इंसान कहलाने का अधिकार नहीं।
राष्ट्रसंत एवं मूर्ति पूजक आचार्य साध्वी श्रमण संघ की उप प्रवर्तनी निर्मला जी महाराज सभी ने मिलकर मुनि कमलेश के नेतृत्व में प्रस्ताव पास किया कि उपासना पद्धति से ऊपर उठकर संगठन एकता और समन्वय पर जोर देते कहा कि इनको आत्मसात के बिना साधना नहीं हो पाएगी नहीं सफलता मिलेगी बिखरा हुआ समाज संगठित होगा तभी संस्कृति तीर्थ और संतों की रक्षा हो पाएगी। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली महिला शाखा के प्रचार मंत्री सरपंच कांग्रेस नेत्री पी सी सी सचिव डॉक्टर अर्चना सुराणा अपने प्रचार के साथ वीरांगना गौ रक्षा नशा मुक्ति और पर्यावरण की जागृति का भी सैकड़ो गांव में दौरा कर रही है।