जैन शासन का सार है कि जो आप अपने लिए चाहते हो वह दूसरों के लिए भी चाहो- प. पू. साध्वी श्री अनंतगुणा श्री जी म.सा.

रतलाम। सौ.वृ.त. श्री राजेंद्र सूरी त्रिस्तुतिक जैन श्वेतांबर श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा नीम वाला उपाश्रय खेरादी वास में रतलाम नंदन प. पू .श्री 1008 जैन मंदिर के प्रेरणादाता, राष्ट्र संत कोकण केसरी गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय लेखेन्द्र सूरीश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्ती एवं मालवमणि पूज्य साध्वी जी श्री स्वयं प्रभा श्री जी म.सा. की सुशिष्य रतलाम कुल दीपिका शासन ज्योति साध्वी जी श्री अनंत गुणा श्रीजी म.सा,श्री अक्षयगुणा श्रीजी म.सा. श्री समकित गुणा श्री जी म.सा. श्री भावित गुणा श्री जी म.सा. उपासना में विराजे हैं जिनका चातुर्मास में नित्य प्रवचन चल रहे हैं इसी तारतम्य में 04 अगस्त 2024 रविवार को साध्वी श्री आज सुबह 25 लोगों का पारणा किया गया। इसके पश्चात मसा ने व्याख्यान दिया। परम पूज्य साध्वी श्री अनंत गुणा श्री जी मसा. ने व्याख्यान में कहां की जो अपने को अच्छा नहीं लगता वह दूसरों को भी अच्छा नहीं लगता।जो अपने को अच्छा लगता है वैसा ही दूसरों के प्रति भी भाव रखना चाहिए। जैन शासन का सार, धर्म का सार यह है उन्होंने कहा कि इसके लिए कोई लंबी चौड़ी व्याख्या नहीं है अपने लिए जो चाहते हो वह दूसरों के लिए चाहो। इसके लिए आप अपने आपके लिए अच्छा चाहते हो दूसरों के लिए नहीं दूसरों नहीं चाहते यही दुख का कारण होता है। यही कारण है कि आप अपने सुख को अपना दुख बना लेते हो दूसरा व्यक्ति मेरे बाद में आया और मेरे से आगे कैसे निकल गया इसका कारण बताया कि उसके पुण्य उदय है इसलिए वह आगे बढ़ गया। ईर्ष्या के कारण भावना आपकी खराब हो जाती है। आपके पापों का उदय होता है तो बिजनेस काम चलता है इसमे दूसरो का कोई दोष नहीं है। आपको स्व कल्याण और पर कल्याण की भावना रखना चाहिए। इसमें मसा. ने चंदूलाल की कहानी सुनाई।
आप में श्रद्धा विश्वास होगा तो गुरु चिमटी भर धूल भी देगा तो भी आपका काम हो जाएगा और बिना श्रद्धा विश्वास के कुछ होने वाला नहीं है। ज्ञानीजन कहते हैं दूसरों से ईर्षा मत करो, राग द्वेष कषाय को दूर रखो और जो दूसरों का हित चाहता है उसका हित भगवान पहले करते हैं। यह आपने समझ लिया तो आपका बेड़ा पार हो जाएगा। उक्त बात प्रवचन में कहीं तत्पश्चात महा मांगलिक प्रारंभ किया गया। आज पुष्य नक्षत्र, रविवार, हरियाली अमावस तथा दिवास है सर्व पितृ की शांति की जाती है इसके लिए महा मांगलिक का दूसरी बार किया जा रहा है। जिससे कि आपके सारे दोष समाप्त हो सके और आप उन्नति कर सके तत्पश्चात महिलाओं,पुरुषों और समाज जनों ने प्रभु की भक्ति की गई और कार्यक्रम के अंत में पुरस्कार वितरण किया गया।सौ. वृ.त. त्रीस्तुतिक जैन श्री संघ एवं राज अनंत चातुर्मास समिति, रतलाम के तत्वाधान में बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्राविकाए उपस्थित थी।

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