

जावरा (अभय सुराणा) । शरीर का कोई गुरु नहीं होता और गुरु का कोई शरीर नहीं होता ।आजकल सीधा गुरु बनने की होड़ है । शिक्षा के साथ दीक्षा और साहित्य के साथ संगीत का मिलन हो जाए तो जीवन सत्यम ,शिवम ,सुंदरम हो जाएगा ।
परिषद द्वारा आयोजित गोष्ठी में हिंदू और मुस्लिम कवियों को साथ साथ देश हित में चिंतन और सृजन करते देखकर बड़ी प्रसन्नता हुई । ये चिंतन ही साहित्यिक और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार कर राष्ट्र हित में देशभक्त जैन झी का निर्माण करेगा ।उक्त विचार राष्ट्र संत पूज्य नमन महाराज ने उक्त कार्यक्रम में व्यक्त किये ।
नागदा से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुंदरलाल जोशी ने कहा कि गुरुमुख से भक्ति की गंगा ,कर्म की जमुना और ज्ञान की सरस्वती प्रवाहित होती है । कार्यक्रम का शुभारंभ साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ प्रकाश उपाध्याय की स्वरचित वाणी वंदना से हुआ । उक्त अवसर पर तीन गुरुओं प्रोफेसर सी एम मेहता ,नरेंद्र सिंह सोलंकी राकेश मिश्रा और शायर फज़ल हयात का शॉल और मोतियों की मालाओं से सम्मान किया गया । उक्त गोष्ठी में कवि राजेंद्र श्रोत्रिय ,मनोहर सिंह मधुकर ,नवनीता चौरसिया ने अपनी सुंदर सार्थक रचनाएं सुनाई ।आयोजन में शहर के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे ।