

मुंबई भायंदर ओस्तवाल बगीची समता भवन । भूख से थोड़ा कम खाना अपने आप में सबसे महान औषधि है । जो शरीर को निरोग मन को निर्मल और आत्मा को पवित्र बनता है ।
उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा कि संसार में भूख से मरने वाले की बजाय ज्यादा खाकर मरने वालों की संख्या ज्यादा है । मुनि कमलेश ने बताया कि तपस्या करना कठिन है उससे भी ज्यादा कठिन है भोजन पर बैठकर उस पर नियंत्रण करना महान तपस्या है। उन्होंने कहा कि भोजन का विचारों के साथ गहरा संबंध है जैसा खाए अन्न वैसा हुए मन सात्विक । आहार के बिना साधना में प्रवेश असंभव है । राष्ट्र संत ने बताया कि भूख से ज्यादा किया गया अमृत जैसा भोजन भी जहर के रूप में परिवर्तित हो जाता है असाध्य रोगों का शिकार हो जाता है ।
जैन संत ने कहा कि क्रोध के आवेश में छोड़ गया भोजन कर्म बंधन का कारण होता है उस समय किया गया भोजन भी आत्मा और शरीर के लिए घातक होता है ।