महापुरुषों ने संवेदना को धर्म का प्राण बताया है- राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश

मुंडावरे भगवान महावीर सेवा केंद्र । कितनी तीर्थ यात्रा, आराधना कर ले संवेदनाहींन के द्वारा की गई सब क्रियाएं पत्थर पर बीज डालने के समान है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा कि विश्व के सभी महापुरुषों ने संवेदना को धर्म का प्राण बताया है। उन्होंने कहा कि संवेदनाहीन इंसान शैतान से भी ज्यादा खतरनाक होता है। दूसरों के बजाय अपनी आत्मा का जन्म जन्मांतर में नुकसान करता है सद्गुणों का नाश करता है।
मुनि कमलेश ने बताया कि पशु भी संवेदना से परिपूर्ण होते हैं वह मनुष्य से भी महान होते हैं जिनको कोई अपेक्षा नहीं होती है देवों जैसे पूजे जाते हैं।
राष्ट्र संत ने कहा कि संवेदना सभी प्राणियों के प्रति बिना भेदभाव के निष्काम और निस्वार्थ हमारी आत्मा के भाव में निर्मित हो जाए तो वह धरती पर चलता फिरता तीर्थ हो सकते है।
पूज्य गुरुदेव सलाहकार श्री सुरेश मुनि जी शास्त्री ने कहा कि धर्म और परमात्मा का दूसरा नाम ही संवेदना है इसको दिल में बसाना चार धामों की यात्रा से बढ़कर है।
अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर से दिवाकर गुरु कमल गौशाला नंदावता को क्रेन महिला शाखा लोनावाला एवं संघ की ओर से कृष्ण महावीर गौशाला कमल तीर्थ कामसेट सुनील महाराज को ₹25000 गायों की दवाई के लिए दिए गए । गौ माता हेतु देश में सैकड़ो गौशाला में दिवाकर मंच की ओर से सेवा प्रदान की जा रही है । सात संत तथा वेरागी अभय जैन एवं गगन चौरडिया जी का आध्यात्मिक मधुर मिलन हुआ।

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