दसमी प्रतिमा व्रत ग्रहण किया

इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। सल्लेखना की साधना में लीन श्री आत्मानन्द सागरजी (पंडित श्री रतनलाल जी शास्त्री इंदौर) ने आज चतुर्दशी के पावन पर्व पर उपवास के साथ दस प्रतिमाओं के व्रत ग्रहण किए -समाधिष्ट महामहिम १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य १०८ मुनि श्री निर्णयसागर जी महाराज के पावन चरणों का पादप्रक्षालन कर प्रतीमा धारण की धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि.आगे कि सल्लेखना की साधना का निर्देशन मुनि श्री के अनुसार ही चलेगा। आज ही मुनि श्री अपने गुरु की आज्ञा से खातेगांव से विहार करके इंदौर पहुंचे हैं, जो की समाधि की साधना में सम्मलित रहेंगे।
इंदौर के समवशरण दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान समाधि की साधना में लीन श्री आत्मानन्द सागर जी ने अष्टमी तिथि को उपवास के साथ नवमी प्रतिमा के व्रत लिए और आज चतुर्दशी को दसवीं प्रतिमा के व्रत उपवास के साथ ग्रहण किए।
समाधिष्ट महामहिमयुग श्रेष्ठ आचार्य, संत शिरोमणि १०८ श्री विद्यासागर जी महामुनिराज से २५ वर्ष पूर्व जिला सागर के टड़ा ग्राम में दो प्रतिमाओं के व्रत अंगिकार किए थे और वर्तमान नवागत आचार्य १०८ श्री समयसागर जी महाराज से नवमी और दसमी प्रतिमा के व्रत ग्रहण कर जीवन के सर्वोच्च शिखर समाधि की साधना में वृद्धि कर, भावों को पवित्रता प्रदान करने बाली मोक्ष मार्ग की सल्लेखना जारी हैं।