राज्य सरकार द्वारा पेंशनरों के साथ फिर खुला अन्याय

रतलाम। मप्र पेंशनर समाज रतलाम की माह मई की बैैठक 4 मई रविवार को गुजराती समाज उमा विद्यालय परिसर में उपाध्यक्ष सुरेन्द्र छाजेड़ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
बैठक में सर्वप्रथम पहलगाम में पाक आतंकवादियों द्वारा 26 निर्दोष-निहत्त्थे भारतीयों की नृशंस हत्या पर आक्रोश व्यक्त करते हुए दिवंगतों को 2 मिनिट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गईऔर आतंकवादियों के क्रूर कृत्य की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए भारत सरकार से आतंकवादियों का पता लगाकर उन्हें भी कठोर दण्ड दिये जाने की मांग कीगई।
बैठक में प्रदेश सरकार के द्वारा पुनः पेंशनरों के साथ खुला अन्याय करने पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया गया। पेंशनरों की डीआर की दो किश्तें बकाया होने के बावजूद एक किश्त 3 प्रतिशत वह भी मार्च 2025 से देने का मप्र शासन ने निर्णय लिया है।
पहला खुला अन्याय तो यह कि दो में से एक डीआर किश्त देने का मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सरकार ने तय किया। फिर दूसरा अन्याय यह कि जो डीआर जुलाई 2024 से देय थी उसे मार्च 2025 से देने का निर्णय किया। इसके कारण प्रदेश के पेंशनर लाखों के बकाया से वंचित कर दिए गए।
मप्र सरकार, मप्र राज्य पुनर्गठन आयोग 2000 की धारा 49(6) को जानबूझ कर विलोपित नहीं कर पेंशनरों को राहत नहीं दे रही है। यह सरकार की ज्यादती है। अधिनियम में छत्तीसगढ़ सहमति की बाध्यता का प्रावधान नहीं है फिर भी दोनों सरकारें पेंंशनरों को प्रताड़ित करने के लिए इसे जबरन हथियार बनाए हुए है। पिछले 24 वर्षों से इस अधिनियम के नाम पर पेंशनरों के हितों पर कुठाराघात किया जा रहा है।
संगठन के उपस्थित साथियों ने और उपाध्यक्ष सुरेन्द्र छाजेड़ ने प्रदेश सरकार से इस अन्यायपूर्ण रवैये को छोड़ने का आग्रह करते हुए बकाया जनवरी 2025 से डीआर किश्त 2% केन्द्र सरकार द्वारा देय दिनांक प्रदेश को देकर तीव्र महंगाई की परेशानी से राहत प्रदान करें।
सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये को देखते हुए पेंशनर साथियों ने सभी पेंशनर संगठन अध्यक्षों को एकजुट होकर जोरदार साझा संघर्ष करने और प्रदेश सरकार को पेंशनरों के आक्रोश एवं संघर्ष शक्ति का परिचय देना चाहिएका सुझाव दिया।
बैठक के अंत में इस माह में जन्मदिन वाले साथी श्री भट्ट एवं बालचन्द सैनी को मोती माला पहना कर बधाई एवं शुभकामनाएं दी गई। अंत में आभार प्रदर्शन सचिव बहादुरसिंह ने माना।

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