

रतलाम । चातुर्मास की श्रृंखला में स्टेशन रोड स्थित चद्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहीं धर्म सभा मे परम पूज्य आचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी म. सा. के परम शिष्य मुनि श्री 108 सद्भाव सागर म. सा. ने अपनी अमृत वाणी में व्यक्त करते हुए कहा कि पुरुषार्थ जीवन में आवश्यक है पुरुषार्थ से कार्य सिद्धि होती है बिना पुरुषार्थ के कुछ भी प्राप्त नहीं होता। हर वस्तु जीव की नियति निर्धारित होती है और उसमें समय लगता है। पर (यानी दूसरों के दोष ) दोष देने से अपनी विशुद्धि का नाश होता है उपाराम की शक्ति को जागृत करना है उपाराम की एकाग्रता बढ़ानी है। जिस दान को तुमने दिया वह तुम्हारा था ही नहीं यह सब पर वस्तु है, जो तुमने दान दिया वह सब पर की वस्तु है निज वस्तु नहीं है जब तक अपने कषाय,राग, द्वेष आदि को छोड़ेगे, नहीं कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है। अभी आपने समय का दान दिया है तो हर्ष हुआ है अन्यथा समय का सदुपयोग नहीं हो पता है दुरुपयोग होता है धन्य है वह श्रावक जिन्होंने धर्म में दान दिया है।
हमारे तीर्थंकरों ने कितना संघर्ष किया इसका उदाहरण हिंसक पशुओं में भी हिंसा छोड़ दी कितना भी सामाजिक सेवा कर लो मुनि को एक ग्रास भी दे देते हैं उन सेवाओं से ज्यादा पुण्य प्राप्त होता है आहर देने से कई फायदे होते हैं बनाने वाले को आनंद आता है देखने वाले को आनंद आता है और खाने बनाते समय मंत्र और भावना शुद्ध हो तो मंत्र की शक्ति बढ़ती है घर का वातावरण अच्छा होता है आहार प्रसादो विशुद्धि आत्मा को तप दिया जाता है तो परमात्मा बन जाती है धर्म ज्ञान की अग्नि में झोकेंगे तो कच्चा माल भी पक्का बनता है साधना आराधना करना आवश्यक है। उससे बात अपने व्याख्यान में कहीं।
चातुर्मास में प्रतिदिन के कार्यक्रम
श्री चंद्रप्रभ दिगम्बर जैन मन्दिर पर मुनि श्री ससंघ के सानिध्य प्रातः 7 बजे जिनेंद्र भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा रहेगी। प्रातः 8:30 बजे से 9:30 बजे तक मंगल प्रवचन रहेगा। संत भवन पर दोपहर 3;30 बजे से 4,30 बजे तक धार्मिक कक्षा शाम 6:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक रहेगी तथा आचार्य भक्ति रात 8 बजे से 9 बजे तक समाज जनों द्वारा श्री चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन मन्दिर पर नवकार मंत्र का जाप किया जाएगा। दिगंबर जैन समाज के सभी समाज जन महिलाएं , पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री चंद्रप्रभ दिगम्बर जैन श्रावक संघ रतलाम के संयोजक मांगीलाल जैन ने दी।