श्रद्धा एवं भक्ति का उमड़ा सैलाब,प्रभु पार्श्वनाथ की स्तुति करने उमड़े हजारों श्रावक-श्राविकाएं

महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में अनुष्ठान आराधना में सर्व सुख समृद्धि की कामना

भीलवाड़ा 24 जुलाई । तीर्थंकर प्रभु पार्श्वनाथ की आराधना करने के लिए श्रद्धा एवं भक्ति से ओतप्रोत श्रद्धालुओं का सैलाब सा उमड़ पड़ा। तीव्र उमस की परवाह किए बिना प्रभु की आराधना के लिए जिसे जहां जहां जगह मिली वहीं बैठ परमात्मा की आराधना में लीन हो गया। अनुष्ठान आराधना में शामिल होने का उत्साह इस कदर था कि विशाल पांडाल भी छोटा नजर आ रहा था। ये नजारा अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में गुरूवार को आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में आयोजित साप्ताहिक अनुष्ठान आराधना में भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति में दिखा। इस दौरान पार्श्वनाथ स्तुति ‘‘प्रणमामि सदा प्रभु पार्श्वजिनं,जिननायक दायक सौख्यघनम्‘‘ गूंजी तो भक्ति का ऐसा रंग जमा तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक उर्जा से परिपूर्ण हो गया। हर कोई इस अनुष्ठान आराधना में शामिल होकर परमात्मा प्रभु पार्श्वनाथ से अपने साथ परिवार,संघ,समाज व राष्ट्र के लिए रिद्धि, सिद्धी,सुख, समृद्धि,यश,प्रतिष्ठा की कामना कर रहा था। महासाध्वी मण्डल ने पार्श्वनाथ स्तुति का जाप कराया। शुद्ध भावों के साथ हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने इस स्तुति का जाप किया तो पूरा वातावरण पवित्र एवं पावन हो गया ओर असीम पॉजिटिव एनर्जी का संचार हुआ। महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. ने श्रीपार्श्वनाथ स्तुति का महत्व बताते हुए कहा कि तीर्थंकरों की साधना हमारी जिंदगी को पवित्र बनाती है। शांति,खुशहाली व भाईचारा बढ़ने की कामना से पार्श्वनाथ प्रभु की स्तुति का अनुष्ठान करने से कर्म निर्जरा भी हुई। महामंगलकारी अनुष्ठान करने एवं जिनवाणी सुनने से जीवन में बदलाव आते है। उन्होंने बताया कि आगामी गुरूवार 31 जुलाई को अनुष्ठान आराधना के तहत आरोग्यता की कामना से भक्तामर के 45वें श्लोक ‘‘उद्भूत भीषण जलोदर भार भुग्ना’’ का जाप किया जाएगा। भीलवाड़ावासियों की भक्ति भावना की सराहना करते हुए कहा कि तीर्थंकर परमात्मा की स्तुति कर्म निर्जरा कर मनुष्य के लिए मोक्ष प्राप्ति की राह खोलती है। अनुष्ठान के शुरू में महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में श्री व्रज पंज्जर स्तोत्र की आराधना की गई। अनुष्ठान में स्वर साम्राज्ञी महासाध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा.,वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा.,विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। अनुष्ठान के शुरू में लाभार्थी परिवारों,अतिथियों एवं चातुर्मास समिति एवं सुभाषनगर श्रीसंघ के पदाधिकारियों द्वारा नवकार मंत्र चौकी की विधिपूर्वक स्थापना की गई। अनुष्ठान के लाभार्थी देवेन्द्रकुमार,स्नेहलता, उन्नत,मोनिका चौधरी परिवार, मनीषकुमार,सुनीलकुमार,मननकुमार चौरड़िया परिवार, राजेशकुमार मंजूजी टोडरवाल परिवार (ब्यावर वाले), राजेन्द्रकुमार शकुन्तलादेवी, पीयूष राखी खमेसरा परिवार,चैन्नई निवासी प्रकाशचंद,विनोदकुमार, सुरेशकुमार सिंघवी परिवार रहा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि न्यायाधीश जगदीश शर्मा, शंकरलाल मारू, पुलिस अधिकारी जितेन्द्रसिंह राठौड़,रामकिशन चौधरी एवं शिवराजजी थे। आजादनगर श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेश बापना, मंत्री प्रवीण कोठारी सहित संघ के सदस्य भी विशेष आमंत्रित थे। अतिथियों एवं लाभार्थी परिवारों का स्वागत चातुर्मास समिति के अध्यक्ष दौलतमल भड़कत्या, सचिव राजेन्द्र सुराना, दिवाकर संघ के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेन्द्रसिंह सुराणा, सुभाषनगर श्रीसंघ के अध्यक्ष हेमन्त कोठारी, मंत्री बंशीलाल बोहरा, सुनील सुराणा, मदनलाल सिपानी, हनुमान गोखरू,अनिल कोठारी, दिनेश डांगी, मनोज मेहता,विक्रम डूंगरवाल,आशीष भड़कत्या, आदेश सुराणा, चातुर्मास समिति महिला मण्डल की अध्यक्ष निर्मला भड़कत्या, मंत्री लाड़जी मेहता, पुष्पा गोखरू,टीना बापना,ममता सुराणा सहित विभिन्न पदाधिकारियों ने किया। अनुष्ठान में शामिल होने के लिए भीलवाड़ा शहर ही नहीं चित्तौड़गढ़,बिजयनगर, गुलाबपुरा,बदनोर,गंगापुर,रायपुर,माण्डल सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाएं उमड़े। अनुष्ठान संपन्न होने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद द्वारा महासाध्वी मंडल के सानिध्य में जीव दया का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

सुश्राविका मनोहरदेवी बिलवाड़िया ने लिए अठाई तप के प्रत्याख्यान

चातुर्मास में महासाध्वी मण्डल की प्रेरणा से त्याग तपस्याओं का दौर निरन्तर गतिमान है। धर्मसभा में सुश्राविका मनोहरदेवी बिलवाड़िया ने महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. के मुखारबिंद से अठाई तप के प्रत्याख्यान ग्रहण किए तो अनुमोदना में हर्ष-हर्ष के जयकारे गूंज उठे। महिला मण्डल की सदस्य तपस्वी सुश्राविका को जयकारों के बीच पांडाल में लेकर आई। श्रीसंघ की और से तपस्वी बहन का सम्मान पांच उपवास की बोली लेने वाली श्राविका ने किया। कई श्रावक-श्राविकाओं ने बेला,उपवास,आयम्बिल, एकासन, तप के प्रत्याख्यान भी लिए। धर्मसभा का संचालन चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने किया। नियमित चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.45 से 10 बजे तक हो रहे है।

साप्ताहिक पद्मावती एकासन आराधना कल

चातुर्मास में शुक्रवार को साप्तहिक पद्मावती एकासन आराधना विधि का आयोजन होगा। एकासन आराधना में शामिल होने के लिए 550 से अधिक श्राविकाओं एवं श्रावकों ने पंजीयन कराया हुआ है। सुबह नियमित प्रवचन के तुरंत बाद एकासन आराधना करने वालों को आरोग्य लाभ की दृष्टि से पंतजलि के विशेषज्ञ द्वारा योगाभ्यास भी कराया जाएगा। एकासन विधि सम्पन्न होने के बाद सामूहिक एकासन की चातुर्मास समिति द्वारा कराया जाएगा। प्रत्येक शनिवार दोपहर 1.30 बजे महिलाओं के लिए प्रश्नमंच एवं हर रविवार दोपहर 1.30 बजे बच्चों के लिए धार्मिक संस्कार शिविर का आयोजन होगा।

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