आत्मा की शुद्धि और मोक्षमार्ग को अपनाना है दीक्षा : डॉ संयमलता म.सा.

वैरागन बहन कु. कोमल छाजेड़ का हुआ अभिनन्दन

रतलाम 2 सितंबर। दीक्षा जीवन का सबसे बड़ा और पवित्र संकल्प है। दीक्षा का अर्थ है—संसारिक मोह, माया, आसक्ति और भौतिक सुखों का त्याग कर आत्मा की शुद्धि और मोक्षमार्ग को अपनाना। यह केवल वस्त्र परिवर्तन या बाहरी रूपांतरण नहीं, बल्कि भीतरी जागृति और आत्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया है। उक्त विचार श्रमण संघीय जैन दिवाकरीय महासाध्वी डॉ. संयमलता म.सा. ने धर्मसभा मे व्यक्त किए ।
आपने कहा की दीक्षा के द्वारा जीव अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानकर, संयम, त्याग और साधना के मार्ग पर अग्रसर होता है। यही जीवन को सार्थक बनाने का सच्चा मार्ग है। दीक्षा कायरो का नहीं शूरवीरों का मार्ग है। राग से त्याग, वासना से उपासना, विराधना से आराधना का मार्ग है दीक्षा।
साध्वी सौरभप्रज्ञा ने कहा जैन दर्शन में इन्द्रियों का विशेष महत्व है, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से आत्मा बाहरी संसार से जुड़ती है। पाँच इन्द्रियों में से एक है ग्राणेन्द्रिय (घ्राण इन्द्रिय – सूंघने की शक्ति)। ग्राणेन्द्रिय का उल्लेख करते हुए साधक को यह समझाया जाता है कि इसकी प्रकृति क्या है, यह आत्मा को कैसे बाँधती है और इससे मुक्त होकर आत्मा किस प्रकार शुद्धि की ओर अग्रसर हो सकती है।ग्राणेन्द्रिय द्वारा प्राणी सुगंध और दुर्गंध का अनुभव करता है। इनसे मोह और द्वेष की भावनाएँ उत्पन्न होती हैं—सुगंध से आकर्षण तथा दुर्गंध से विरक्ति। यही आकर्षण और विरक्ति आत्मा को कर्मबंधन में बाँधते हैं। जैसे इत्र, धूप या स्वादिष्ट पकवानों की सुगंध मन को बाँध लेती है, वहीं दुर्गंध चिड़चिड़ापन या घृणा पैदा करती है।
श्रीसंघ मीडिया प्रभारी निलेश बाफना ने बताया की डॉ. अमितप्रज्ञाजी म.सा., डॉ. कमलप्रज्ञाजी म.सा. आदि ठाणा-4 के सान्निध्य में दीक्षार्थी जामनेर निवासी कुमारी कोमल जी छाजेड़ का स्वागत एव अभिनंदन श्रीसंघ के वरिष्ठ महेन्द्र बोथरा, विनोद बाफना, अमृत कटारिया, जयंतिलाल डांगी, विनोद कटारिया, आशीष कटारिया, वीरेंद्र कटारिया व रतलाम श्री संघ, महिला मंडल, बहुमंडल, युवा मंडल द्वारा दीक्षार्थी बहन का अभिनन्दन किया गया। ज्ञातव्य रहे की संथारा प्रेरिका महासाध्वी सत्यसाधना म.सा के सान्निध्य में 16 जनवरी 2026 को जामनेर में कु. कोमल छाजेड की दीक्षा होने जा रही है। इस अवसर पर महासाध्वी डॉ. संयमलता म.सा. ने अपना विशेष आशीर्वाद प्रदान कर मांगलिक श्रावण करवाई ।

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