
रतलाम। भारत की लोक और जनजातीय भाषाएँ, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण और व्याख्या पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन प्रतिष्ठित संस्था प्रतिकल्पा के द्वारा कालिदास अकादमी उज्जैन में किया गया।यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश एवं पर्यटन विभाग, मध्यप्रदेश के सहयोग से आयोजित किया गया।दिनांक 14 सितंबर, रविवार को संस्था के मुख्य समन्वयक एवं सम्राट विक्रमादित्य विश्व विद्यालय उज्जैन के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा के मार्गदर्शन में तीन सत्रों में संपन्न हुई संगोष्ठी में देश-विदेश के लगभग 30 विद्वानों के शोध पत्रों की प्रस्तुति हुईं। प्रस्तुत शोध-पत्रों में से दस श्रेष्ठ शोधपत्रों का चयनकर उन्हें सम्मानित किया गया, जिनमें रतलाम का नाम गौरवान्वित करने वाले इतिहासविद नरेंद्रसिंह पॅंवार को भी स्थान मिला है। श्री पॅंवार के शोध-पत्र का शीर्षक था- ‘लोक संस्कृति का त्रिवेणी का समागम- रतलाम’ था।
श्री पॅंवार ने अपने शोध-पत्र में रतलाम को गुजरात, राजस्थान और मालवा की लोक-संस्कृति का समागम स्थल निरुपित किया। रतलाम में भाषाई, खान-पान, वेशभूषा और तीज त्यौहार के स्तर पर तीनों संस्कृतियों का प्रभाव परिलक्षित होता है। रतलाम की लोक संस्कृति मालवा, राजस्थान, और गुजरात की संस्कृतियों का एक सुंदर मिश्रण है, जो इसके लोक नृत्य, संगीत, हस्तशिल्प, व्यंजन, और उत्सवों में झलकती है। आदिवासी समुदायों की समृद्ध परंपराएँ और ऐतिहासिक विरासत रतलाम की सांस्कृतिक विरासत को और भी विशिष्ट बनाती हैं।
श्री पॅंवार ने अपने शोध-पत्र में रतलामी सेंव, दाल-बाटी से लेकर मालवी में रचना करने वाले शहर के साहित्यकार- जुझारसिंह भाटी, आशीष दशोत्तर, कैलाश वशिष्ठ, संजय परसाई सरल, गौरीशंकर दुबे, डॉ शोभना तिवारी, सतीश जोशी नगरा, यशपालसिंह तंवर, स्व. डॉ देवव्रत जोशी, स्व. किसनदास राही, स्व.पीरुलाल बादल सहित कई साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए उनकी रचनाओं से परिचित भी करवाया।इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कला मनीषी नर्मदाप्रसाद उपाध्याय इंदौर थे। विभिन्न सत्रों में संपन्न हुई संगोष्ठी में नेपाल से आए विद्वान डॉ अंजनीकुमार झा, पद्मश्री कालूराम बामनिया, डॉ पूरन सहगल, डॉ. रेखाकुमारी राय, (जनकपुर नेपाल), डॉ. श्रीनिवास शुक्ल सरस (सीधी), डॉ. आर सी ठाकुर (महिदपुर), डॉ. ध्रुवेंद्रसिंह जोधा (भोपाल), डॉ. अंतरा करवड़े, वसुधा गाडगिल(इंदौर), मोना कौशिक (बल्गारिया) आदि अतिथि के रुप में उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत संस्था अध्यक्ष डॉ. शिव चौरसिया, निदेशक डॉ. पल्लवी किशन, सचिव कुमार किशन ने किया। विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों, शोधार्थी आदि ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। निर्गुणी गायक दयाराम सारोलिया द्वारा लोक गीत प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ श्रीराम सौराष्ट्रीय और पूजा परमार ने किया और आभार प्रदर्शन समन्वयक प्रो. जगदीशचंद्र शर्मा ने किया।